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रूस और दक्षिणपंथी समूहों पर जर्मनी में हुए साइबर हमले का शक
जर्मनी की साइबर सिक्यॉरिटी अथॉरिटी ने देश में हुए व्यापाक साइबर हमले के मामले में ख़ुद का बचाव किया है. इस हमले में सैकड़ों नेताओं की निजी जानकारियों को सार्वजनिक कर दिया गया.
इस मामले में साइबर सिक्यॉरिटी अथॉरिटी को ख़ासी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि अथॉरिटी को कई हफ़्तों पहले से इस साइबर हमले की जानकारी थी, लेकिन उसने पुलिस को नहीं बताया.
हालांकि, एजेंसी का कहना है कि उसे गुरुवार रात तक इस डेटा लीक के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी.
इस साइबर हमले में जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल समेत सैकड़ों जर्मन नेताओं, पत्रकारों और अलग-अलग क्षेत्रों की ख़ास हस्तियों की निजी जानकारियां इंटरनेट पर सार्वजनिक कर दी गईं.
हालांकि, अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि हमले के पीछे कौन था.
यह साइबर हमला दिसंबर में हुआ था, लेकिन इसके बारे में शुक्रवार को पता चला.
साइबर अटैक का शिकार हुई हस्तियों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, व्यक्तिगत बातचीत (चैट मैसेज) और आर्थिक मामलों से जुड़ी जानकारियां ट्विटर पर जारी कर दी गईं. हालांकि, दक्षिणपंथी राजनेता इस हमले से बच गए.
गृह मंत्री का कहना है कि संसदीय या सरकारी सिस्टम के चपेट में आने के कोई सबूत नहीं मिले हैं और ये भी साफ नहीं है कि ये हमला हैकिंग की वजह से हुआ या कोई लीक डेटा को हासिल करने की कोशिश कर रहा था.
कौन कब, क्या जानता था?
इन्फोर्मेशन सिक्यॉरिटी का संघीय कार्यालय (बीएसआई) फ़िलहाल आलोचना के घेरे में है. कहा जा रहा है कि बीएसआई को दिसंबर से इस लीक की जानकारी थी, लेकिन संघीय क्राइम ऑफ़िस को इस बारे में शुक्रवार को बताया गया.
बीएसआई के अध्यक्ष ने कहा कि "उनकी टीम ने प्रभावित सांसदों से दिसबंर में ही बात की थी" और "मोबाइल इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम" बनाई थी.
हालांकि शनिवार को बीएसआई ने एक बयान में कहा कि उन्हें कई हफ्तों तक सिर्फ़ पांच अलग-अलग मामलों के बारे में पता था और गुरुवार तक वो इन सभी मामलों के तार नहीं जोड़ पाए थे.
इससे पहले वामपंथी पार्टी डी लिंका के प्रमुख डीटमर बाच ने कहा कि इस घटना को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. बाच ने बीएसआई से पूछा कि क्या वो और "कुछ भी छिपा रही है."
इस बीच सांसद एंड्रे हेन ने कहा कि मुझे हैरानी है, "मुझे इस लीक के बारे में मीडिया से पता चला, जबकि मैं पार्लियमेंट्री मॉनिटरिंग ग्रुप का सदस्य हूं. संघीय सरकार का कर्तव्य है कि वो क्रिसमस और नए साल के बीच भी संसद को ज़रूरी जानकारियां दे."
निशाने पर कौन था?
राष्ट्रीय और कुछ स्थानीय नेताओं के साथ-साथ टीवी शख्सियतों की जानकारी भी चोरी हुई है:
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल: इनका इमेल पता और कई लेटर ऑनलाइन जारी कर दिए गए.
मुख्य संसदीय दल, जिनमें सत्ताधारी सेंटर-राइट और सेंटर-लेफ्ट पार्टियां और ग्रीन्स, लेफ्ट-विंग डी लिंका और एफ़डीपी शामिल हैं. सिर्फ़ एएफडी साइबर हमले से बच पाई है.
ग्रीन्स के नेता रोबर्ट हबेक की परिवार वालों के साथ निजी बीतचीत (चैट मैसेज़) और कार्ड डिटेल ऑनलाइन पोस्ट की गई है.
पब्लिक ब्रॉडकास्टर एआरडी और ज़ेडडीएफ के पत्रकारों और कुछ टीवी व्यंगकारों और रैपरों के डेटा लीक हुए हैं.
लीक हुई जानकारियों से कितना बड़ा नुकसान हुआ है, इसका आकलन अभी नहीं हो सका है, लेकिन जर्मनी में न्यायिक मामलों की मंत्री कैटरीना बारले के मुताबिक ये एक "बेहद गंभीर" हमला था.
उन्होंने कहा, "इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों ने लोकतंत्र और संस्थाओं में हमारे विश्वास को डिगाने की कोशिश की है."
अभी तक ये पता तो नहीं चल पाया है कि हमले के पीछे कौन था, लेकिन शक की सुई जर्मनी के दक्षिणपंथी समूहों और रूस की ओर है.
रूस पर पहले भी जर्मनी में साइबर हमले करने के आरोप लगे हैं. पिछले साल सरकार के आईटी नेटवर्क पर हमला हुआ था, इसका संदिग्ध भी रूस को ही बताया गया था.
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