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EVM हैकिंग: हार्दिक पटेल के दावों की हकीकत?
गुजरात और हिमाचल प्रदेश के अब तक आए नतीजों से साफ है कि बीजेपी दोनों राज्यों में जीत की ओर है.
बीजेपी समर्थक जहां इस जीत से उत्साह में नज़र आ रहे हैं. वहीं, कांग्रेस समर्थक अपनी हार के बावजूद प्रदर्शन को राहुल गांधी के कुशल नेतृत्व से जोड़कर देख रहे हैं.
लेकिन सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया पर ईवीएम फिर से चर्चा में है. हार्दिक पटेल ने भी चुनावी नतीजों के बाद कहा, ''बेईमानी करके जीत हासिल की है. अगर हैकिंग न हुई होती तो बीजेपी जीत हासिल नहीं कर पाती. विपक्षी दलों को ईवीएम हैक के ख़िलाफ़ एकजुट होना चाहिए. अगर एटीएम हैक हो सकता है तो ईवीएम क्यों हैक नहीं हो सकती.''
वहीं, कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी कांग्रेस की जीत के पक्ष में किया अपना एक पुराना ट्वीट री-ट्वीट करते हुए लिखा, ''मैं अब भी इस ट्वीट पर कायम हूं. अगर ईवीएम से छेड़छाड़ न हुई होती तो रिजल्ट कांग्रेस के पक्ष में होता.''
साल 2009 में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी ईवीएम को लेकर संदेह जताया था और परम्परागत मतपत्रों की वापसी की मांग की थी.
गुजरात, हिमाचल प्रदेश नतीजों के बाद ईवीएम से छेड़छाड़ को लेकर स्थिति यूपी चुनाव के बाद जैसी हो गई है. जब मायावती ने ईवीएम छेड़छाड़ को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे.
ऐसे में सवाल है कि क्या वाकई ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है?
हमने पाठकों से पूछा था कि वो गुजरात चुनावों को लेकर किस तरह की कवरेज चाहते हैं और कुछ पाठकों ने सवाल किया कि क्या ईवीएम हैक हो सकती है? ये कहानी उसी का जवाब तलाश रही है.
मई 2010 में अमरीका के मिशिगन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उनके पास भारत की ईवीएम को हैक करने की तकनीक है.
शोधकर्ताओं का दावा था कि ऐसी एक मशीन से होम मेड उपकरण को जोड़ने के बाद पाया गया कि मोबाइल से टेक्स्ट मैसेज के जरिए परिणामों में बदलाव किया जा सकता है.
हालांकि पूर्व चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति की अलग राय है.
उन्होंने मार्च 2017 में बीबीसी संवाददाता मानसी दाश से खास बातचीत में कहा था, "जो मशीन भारत में इस्तेमाल की जाती है, वो मज़बूत मशीनें हैं और मुझे नहीं लगता कि उन्हें हैक किया जा सकता है."
उन्होंने कहा, "ऐसा हो सकता है कि पोलिंग बूथ पर मशीन चलाने वाले ठीक से इसे चला ना पाएं लेकिन मतदान से पहले इन मशीनों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है."
कृष्णमूर्ति ने कहा था, "इससे पहले भी कई लोगों ने ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, लेकिन अदालत में ये आरोप साबित नहीं किए जा सके और सुप्रीम कोर्ट ने मामले को ख़ारिज कर दिया था."
उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को इसमें पेपर ट्रेल की मांग की थी और इसे बाद में जोड़ दिया गया.
शारदा यूनिवर्सिटी में शोध और तकनीकी विकास विभाग में प्रोफेसर अरुण मेहता ने बताया था, "ईवीएम में कंप्यूटर की ही प्रोग्रामिंग है और उसे बदला भी जा सकता है. आप इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन ये भी देखें कि हैकर्स भी बेहतर होते जा रहे हैं."
कितनी तरह की होती हैं ईवीएम मशीनें?
प्रोफेसर अरुण मेहता बताते हैं, ''दो तरह की ईवीएम होती हैं, एक वो जिसमें आप दोबारा वोटों की गिनती नहीं कर सकते और एक वो जिनमें वोटों की गिनती दोबारा की जा सकती है.''
वे कहते हैं, "पुरानी मशीनों का विरोध किया गया था जिसके बाद उनका इस्तेमाल बंद हो गया है. अभी जो मशीनें इस्तेमाल होती हैं उनमें पेपर ट्रेल लगा दिया गया है ताकि वोटों की फिर से गिनती की जा सके लेकिन इनमें वोटरों की पहचान पता चलने का ख़तरा है."
प्रोफेसर अरुण मेहता कहते हैं, "खुद चुनाव आयोग ने एक आरटीआई में इस बात को स्वीकार किया है."
हालांकि प्रोफेसर अरुण मेहता मानते हैं कि अदालत में ये कहना काफी नहीं है कि ईवीएम हैक हो सकती है. इसके लिए सबूत पेश करने होते हैं और ऐसा करना काफी मुश्किल है.
ईवीएम की सिक्योरिटी पर नज़र रखने वाले तकनीकी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मशीनों को हैक करना कोई बड़ी बात नहीं है और ऐसा साबित भी किया जा चुका है.