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नरेंद्र मोदी और डोनल्ड ट्रंप के मामले में गूगल सर्च निष्पक्ष है या नहीं?
- Author, यजुष गुप्ता
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने 11 दिसंबर को अमरीकी संसदीय समिति के सवालों के जवाब दिए.
उनकी यह पेशी साढ़े तीन घंटे चली जिसमें उनसे कई सवाल पूछे गए, उन्हें अमरीकी संसद में इसलिए बुलाया गया था क्योंकि कुछ लोगों कहना था कि गूगल दक्षिणपंथी नेताओं के ख़िलाफ़ पक्षपात करता है.
एक दिलचस्प सवाल जो सुंदर पिचई से पूछा गया, वह ये था कि क्या कोई व्यक्ति पर्दे के पीछे बैठता है, जो गूगल पर खोज को प्रभावित करता है?
इसका जवाब सुंदर पिचई ने विस्तार से दिया. उन्होंने स्पष्ट किया यह काम कंप्यूटर करता है और इसमें किसी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं होती.
हम लगभग हर दिन गूगल का उपयोग करते हैं, लेकिन शायद ही कोई यह समझता है कि गूगल सर्च असल में कैसे काम करता है.
तो गूगल खोज कैसे काम करता है?
सदन में पिचई ने समझाया कि कंपनी सर्च में मैन्युअल रूप से नहीं, बल्कि बिल्कुल स्वचालित रूप से कार्य करता है. किसी भी कीवर्ड को डालने पर, गूगल सबसे पहले "क्रॉलरों" के माध्यम से वेब स्कैन करता है. क्रॉलर की भूमिका खोज में सबसे महत्वपूर्ण है.
लेकिन ये क्रॉलर हैं क्या?
क्रॉलर्स को हम छोटे रोबोट की तरह समझ सकते हैं जो गूगल को इंटरनेट पर मौजूद सभी वेबसाइट अथवा फाइल की जानकारी देते हैं. इस जानकारी को वह गूगल के सर्वर पर भेजते हैं.
खोज के वक़्त ये क्रॉलर्स अपने इंडेक्स में अरबों रजिस्टर्ड पेजों को स्कैन करके उस शीर्षक और जानकारी मेल खाने वाले पन्नों, तस्वीरों या ऑडियो-वीडियो या दूसरी चीज़ें रिज़ल्ट के तौर पर दिखाता है.
मिसाल के तौर पर, अगर कोई गूगल पर "बीबीसी हिंदी" खोजता है तो "बीबीसी हिंदी" एक कीवर्ड है.
गूगल अपने क्रॉलरों को करोड़ों रजिस्टर्ड पन्नों पर भेज देता है, जो कीवर्ड के अलावा, संस्थान की इंटरनेट पर मौजूदगी, उसकी विश्वसनीयता, प्रभाव, प्रासंगिकता जैसे कई पैमानों पर जांच करने के बाद रिज़ल्ट देता है, रिज़ल्ट इस बात पर भी निर्भर करता है कि सर्च करने वाला व्यक्ति कहां बैठा है.
पेज रैंक
इसके बाद वह ऊपर लिखे पैमानों के हिसाब से रिज़ल्ट्स की रैंकिंग करके उनको उसी क्रम में दिखाता है. मोटे तौर पर लोकप्रियता, प्रासंगिकता और प्रामाणिकता वे तीन पैमाने हैं जिनके आधार गूगल सर्च रिज़ल्ट दिखाता है.
गूगल पेज 'रैंक' नाम के एक ट्रेडमार्क एल्गोरिदम का उपयोग करता है जो प्रासंगिकता के आधार पर प्रत्येक वेबपेज को स्कोर देता है. यह प्रासंगिकता, ताज़गी, लोकप्रियता और अन्य लोगों के उपयोग के आधार पर रिज़ल्ट दिखाता है.
इसी आधार पर सबसे ऊँचे रैंक वाले पेज को गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखाता है.
इडियट लिखने पर ट्रंप की तस्वीर क्यों दिखती है?
इडियट कीवर्ड पर अमरीकी राष्ट्रपति की तस्वीर दिखने का कारण गूगल का एल्गोरिदम है, जिसनें लाखों लोगों के सर्च के पैटर्न को देखते हुए दोनों शब्दों (ट्रंप और इडियट) को एसोसिएटेड यानी जुड़ा हुआ मान लिया है.
दरअसल, जब कई लोग दो शब्दों को बार-बार जोड़ना शुरू कर देते हैं, तो गूगल का सिस्टम उसे अच्छी प्रासंगिकता समझने लगता है.
ब्रितानी अख़बार गार्डियन के मुताबिक, यह शुरू हुआ जब जुलाई 2018 में ग्रीन डे का गीत- अमरीकन इडियट का इस्तेमाल ट्रम्प के लंदन दौरे के समय ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. तब से उस गीत को अमरीकी राष्ट्रपति से जोड़ा जाने लगा.
गूगल एल्गोरिदम
इसी तरह, लोगों ने रेडडिट फोरम पर कैप्शन "इडियट" के साथ ट्रंप की तस्वीर वाली एक पोस्ट पर बड़ी संख्या में वोट देना शुरू कर दिया. जिसकी वजह से गूगल के एल्गोरिदम ने दोनों शब्दों के बीच कनेक्ट के पैटर्न को समझा.
यही वजह है कि लोकप्रियता और प्रासंगिकता जो गूगल सर्च की बड़ी कसौटी हैं, उन पर ट्रंप और इडियट एक साथ आ गए, जिसे कुछ लोगों ने समझा कि गूगल जान-बूझकर ऐसा कर रहा है.
एक डेमोक्रेट सांसद टेड लियू ने सुनवाई के दौरान काफ़ी पते की बात कही, "अगर आपको अपने नाम के साथ निगेटिव सर्च रिज़ल्ट मिल रहे हैं, तो गूगल, फ़ेसबुक या ट्विटर को दोष देने के बदले अपने गिरेबान में झांके. अगर आप सकारात्मक खोज परिणाम चाहते हैं, तो सकारात्मक काम करने होंगे."
इसी तरह साल 2015 में, "दुनिया के शीर्ष 10 अपराधियों" में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की छवि प्रकाशित होने पर इलाहाबाद की एक अदालत ने गूगल के खिलाफ नोटिस जारी किया था. गूगल ने बाद में माफी मांगी और कहा कि वह परिणाम एक ब्रिटिश समाचार पत्र के कारण था जिसने गलत मेटाडेटा के साथ मोदी की एक छवि प्रकाशित की थी.
मेटाडेटा उस जानकारी को कहते हैं जिसे प्रकाशक अपनी रिपोर्ट के भीतर लिखते हैं.
गूगल कई बार स्पष्ट कर चुका है कि वह किसी भी व्यक्ति, संस्था या कंपनी के बारे में सर्च के परिणामों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है, हालांकि गूगल पर ऐसा करने के आरोप लगते रहते हैं.
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