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चीन के बाज़ार में 'गूगल का सीक्रेट मिशन'
कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि गूगल अपने सर्च इंजन का एक नया संस्करण विकसित कर रहा है. ये नया सर्च इंजन चीन के सेंसरशिप क़ानूनों के अनुरूप होगा.
'द इंटरसेप्ट' नाम की एक ऑनलाइन समाचार साइट ने लीक हुए कुछ दस्तावेज़ों के हवाले से इसके बारे में लिखा है.
इस साइट के अनुसार, गूगल ड्रैगनफ़्लाई नाम के कोड प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. इंटरसेप्ट के मुताबिक़ ये सर्च इंजन मानवाधिकार और धर्म जैसे टर्म्स को ब्लॉक कर देगा.
अगर ऐसा हुआ, तो इससे मानवाधिकार से जुड़े कार्यकर्ता ज़रूर नाराज़ होंगे.
हालांकि चीन के सरकारी अख़बार, सिक्योरिटीज़ डेली ने इन रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है.
गूगल के प्रवक्ता ने कहा है कि वो अपने भविष्य की योजनाओं पर कोई अटकलबाज़ी नहीं करते.
इंटरसेप्ट ने और क्या कहा?
गूगल के कुछ आंतरिक दस्तावेज़ों और अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए, इंटरसेप्ट ने लिखा है कि साल 2017 में गूगल ने प्रोजेक्ट ड्रैगनफ़्लाई फिर से शुरू किया था.
दिसंबर में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और चीनी सरकार के कुछ अधिकारियों की मुलाक़ात के बाद इस प्रोजेक्ट में तेज़ी आई.
रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि अगर चीन सरकार से मंज़ूरी मिल जाती है तो गूगल अगले 9 महीने के भीतर एंड्रॉयड के दो नए संस्करण लॉन्च कर सकता है. इनका नाम 'माओटाई' और 'लॉन्गफ़ाई' होगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अलग-अलग स्रोतों ने भी इस रिपोर्ट की पुष्टि की है.
ये सर्च इंजन काम कैसे करेगा?
कथित तौर पर लीक हुए गूगल के आंतरिक दस्तावेज़ों के अनुसार, ये सर्च इंजन कई किस्म के 'संवेदनशील प्रश्नों' को ब्लैकलिस्ट कर देगा.
ये सर्च इंजन उन वेबसाइट्स की भी छँटनी कर देगा जिन्हें वर्तमान में चीन की तथाकथित 'ग्रेट फ़ायर-वॉल' द्वारा ब्लॉक किया गया है.
ये भी कहा गया है कि बीबीसी न्यूज़ की वेबसाइट और विकिपीडिया भी उन साइट्स में शामिल होंगी, जिन्हें ब्लॉक किया गया है.
गूगल ने क्या कहा?
गूगल ने आधिकारिक तौर पर 'द इंटरसेप्ट' की इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
गूगल के प्रवक्ता ताज मेडोज़ ने कहा, "हम भविष्य की योजनाओं से जुड़ीं अटकलों पर टिप्पणी नहीं करते."
वहीं गूगल के एक कर्मचारी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस परियोजना में शामिल होने से बचने के लिए ख़ुद को इससे अलग कर लिया है.
एक अन्य स्रोत ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "कुछ लोग वाक़ई हैरान हैं कि हम लोग ऐसा कर रहे हैं."
कार्यकर्ताओं का नज़रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि गूगल को इस कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए.
एमनेस्टी के लिए काम करने वाले एक चीनी शोधकर्ता पैट्रिक पून ने कहा है, "अगर गूगल चीन के सेंसरशिप नियमों को स्वीकार करके ऐसा करता है तो ये इंटरनेट की स्वतंत्रता के लिए एक काला दिन होगा. वो भी सिर्फ़ बाज़ार से मुनाफ़ा कमाने के लिए."
उन्होंने कहा, "अगर गूगल मानवाधिकारों से पहले अपने मुनाफ़े को अहमियत देगा, तो ये एक बुरी मिसाल बनेगी. और इसे चीनी सरकार की जीत के तौर पर देखा जायेगा."
चीन का क्या कहना है?
चीन के सरकारी मीडिया ने 'द इंटरसेप्ट' की इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि चीन के बाज़ार में गूगल की वापसी की रिपोर्ट सच नहीं है.
रॉयटर्स ने एक चीनी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि गूगल इस मामले पर चीनी अधिकारियों के संपर्क में रहा है, लेकिन अभी तक इस कार्यक्रम के लिए कोई मंज़ूरी नहीं दी गई है.
चीन दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार है. चीन में गूगल के क़रीब 700 कर्मचारी हैं जो वर्चुअल इंटेलिजेंस समेत कई योजनाओं को विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं.
चीन में गूगल का मुख्य सर्च इंजन और वीडियो प्लेटफ़ार्म यूट्यूब काम नहीं करता है. सरकार ने इन्हें ब्लॉक कर रखा है.
पिछले साल ही चीन ने गूगल के स्मार्टफ़ोन पर अनुवाद करने वाले ऐप को स्वीकृति दी है.
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