ट्रेन में इससे ज़्यादा सामान ले गए तो लगेगा जुर्माना

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- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्या ट्रेन में ज़्यादा सामान ले जाने पर जुर्माना भरना होगा? आज यानी 6 जून के अख़बारों में ख़बर छपी है कि सामानों के वज़न पर रेलवे की सख़्त नज़र होगी.
क्या आपको पता है कि रेलवे के किस कोच में एक यात्री कितना किलो सामान लेकर जा सकता है? क्या रेलवे ने एक यात्री के लिए सामान की जो सीमा तय की है उससे ज़्यादा ले जाने पर जुर्माना भरना होगा?
सबसे पहले तो ये जान लें कि यह कोई नया नियम नहीं है. फ़िलहाल इसकी चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि भारतीय रेलवे इस नियम को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है.
रेल बोर्ड के सूचना एवं प्रचार निदेशक वेद प्रकाश कहते हैं, "यह कोई नया नियम नहीं है. यह सालों पहले का नियम है. जब से ट्रेन में टिकट दिए जा रहे हैं तब से यह नियम है, लेकिन 29 अगस्त 2006 में इसमें कुछ संशोधन किए गए थे."

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ट्रेन के किस कोच में कितने वज़न का सामान?
वेद प्रकाश कहते हैं कि रेलवे ने हर क्लास के लिए वज़न की सीमा तय कर रखी है-
- फ़र्स्ट एसी में 70 किलोग्राम
- सेकेंड एसी में 50 किलोग्राम
- थर्ड एसी और चेयरकार में 40 किलोग्राम
- स्लीपर में 40 और जनरल में 35 किलोग्राम जबकि वेंडर्स के लिए 65 किलोग्राम
रेलवे का कहना है कि यह नियम भले पुराना है, लेकिन अब इसे सख़्ती से लागू करने पर ज़ोर दिया जाएगा. रेलवे ने अभी ये साफ़ नहीं किया है कि जुर्माने की रक़म क्या होगी.
इसके साथ ही यह भी साफ़ नहीं है कि रेलवे कैसे तय करेगा किसी यात्री के पास तय वज़न से ज़्यादा सामान है.

वेद प्रकाश मानते हैं ये बहुत ही वाजिब वज़न सीमा है. प्रति व्यक्ति वज़न के लिहाज़ से देखा जाए तो अगर एक परिवार में चार लोग हैं तो स्लीपर में सफर करने वाला यह परिवार 150 किलो से अधिक वज़न का सामान लेकर यात्रा कर सकता है.
कोई इससे अधिक सामान लेकर चल रहा है तो दूसरे पैसेंजर को तक़लीफ़ हो सकती है. रेलवे के अनुसार सामान का वज़न, ट्रेन और तय की जाने वाली दूरी पर निर्भर करेगा.
ज़्यादा पैसे देकर यात्री स्लीपर क्लास में भी अधिकतम 80 किलोग्राम सामान ले जा सकते हैं. सेकंड क्लास वाले भी ऐसा करके 70 किलोग्राम कोच में ले जा सकते हैं.

यात्रियों का क्या कहना है?
स्वप्निल आज़मगढ़ के रहने वाले हैं और दिल्ली में पढ़ाई करते हैं. हर पांच-छह महीने में घर आते-जाते रहते हैं. जब उनसे इस नियम के बारे में बात की तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि रेलवे यह नियम भी है.

"मैं तो इस नियम के बारे में पहली बार सुन रहा हूं. पेपर में पढ़ा था, लेकिन ये नहीं मालूम था कि ऐसा कोई नियम है वो भी सालों से. मेरे जैसे लोगों के लिए तो ये नियम ठीक नहीं है."
दिल्ली में नौकरी करने वाली रिचा इस नियम के बारे में जानकर काफ़ी ख़ुश हुईं. रिचा का कहना है कि अगर ऐसा नियम है तो इसका सख़्ती से पालन होना चाहिए.
रिचा कहती हैं, "मैं तो बहुत ख़ुश हूं. दरअसल, होता ये है कि जो लोग छोटे बच्चों के साथ ट्रैवल करते हैं वो भूले-भटके ही उनकी सीट बुक कराते हैं. पहले से ही एक सीट पर दो लोग होते हैं. बच्चे हैं तो सामान ज़्यादा होते हैं. ऐसे में लोअर बर्थ के नीचे जगह भर जाती है और दूसरों को सामान सीट पर रखकर चलना पड़ता है."
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