क्या ठंडे पानी से नहाने पर सच में कोई फ़ायदा होता है?

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कई दावों से पता चला है कि रोजाना ठंडे पानी से नहाना यानि कोल्ड शावर लेना सेहत के लिए अच्छा होता है.
ठंडे पानी से नहाने पर आपकी आदतों में कई सुधार हो सकते हैं. इनमें कुछ मुख्य फ़ायदे है, जैसे- रक्त संचार अच्छा होना, तनाव कम होना, उत्साह और जागरूकता में बढ़ोत्तरी होना, आदि.
इस आदत से तनाव और चिंता कम होती है, साथ ही व्यायाम के बाद मांसपेशियों की मरम्मत का मामला हो या वसा को कम करने की बात हो या फिर इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाना, इन सबमें लाभ मिलता है.
क्या ये वैज्ञानिक अध्ययनों में साबित हुआ है? और अगर वाक़ई ऐसा है तो क्या इन फ़ायदों के चलते आप ठंडे पानी से नहाएंगे.

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ये तो साफ़ बात है कि ठंडे पानी के संपर्क में हमारी त्वचा के आने पर शरीर को झनझनाहट सी होती है और शरीर तनाव में उस पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है, जो दिल की धड़कन और रक्तसंचार को बढ़ाता है.
दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर भी ठंडे पानी से नहाना बहुत ही सुरक्षित माना जाता है. कंपकंपी के अलावा इसका और कोई उल्टा प्रभाव नहीं पड़ता जो शरीर को नुकसान पहुंचाए.
बीबीसी के प्रोग्राम ट्रस्ट मी, आय एम ए डॉक्टर डॉ क्रिस वान टोलेकन कहते हैं, "हां अगर आप बहुत बूढ़े हैं या आपको कोई दिल की बीमारी है तो आप बेहोश हो सकते हैं या आपको हार्ट अटैक भी आ सकता है."

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तनाव और चिंता
हालांकि इसका कोई क्लीनिकल ट्रायल नहीं हुआ है जिसमें पता चल सके कि कोल्ड शावर चिंता और तनाव की समस्या कम करता है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये इसमें मदद कर सकता है.
ठंडे पानी से नहाने पर शरीर के नुकसानदायक रसायन और हार्मोंन शरीरे से बाहर निकल जाते है जिससे व्यक्ति को तनाव महसूस होता है.
2013 में टीईडी टॉक में ट्राएथलीट जोएल रनयोन का ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया था कि कोल्ड शावर से आप उन परिस्थितियों से लड़ने के तरीके बदल सकते हैं जिनसे आप डरते हैं और आप असहज महसूस करते हैं.
दूसरी ओर एक और तर्क दिया जाता है कि ठंडे पानी से नहाने वालों के दिमाग पर अचानक एक झटका सा लगता है, जो एक एंटीडिप्रसेंट प्रभाव हो सकता है.
इम्यून सिस्टम के लिए?
डॉ क्रिस वान टोलेकन के अनुसार, इस फ़ायदे के लिहाज से ये कोई अंतिम साक्ष्य नहीं है.
2016 में प्लॉस वन (PLOS One) पत्रिका में एक डच अध्ययन छपा था जिसमें कोल्ड शावर के स्वास्थ्य पर प्रभाव बताया गया है. अध्ययन में पाया गया कि 90 दिनों के दौरान रोजाना ठंडे पानी से नहाने की आदत से इस अध्ययन में शामिल 29 फ़ीसदी लोगों की बीमारी में कमी देखने को मिली थी.

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अध्ययन के दौरान इन लोगों को गर्म पानी से सामान्य शावर के अन्त में उन्हें 30, 60 या 90 सेकेंड की अवधि के लिए ठंडे पानी से नहाने के लिए कहा गया.
शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोल्ड शावर लेने से कोई फ्लू नहीं होता और न ही इसका कोई ग़लत असर होता है और ना ही कितनी देर तक ठंडे पानी से नहाया, इसका असर होता है.
हिस्सा लेने वालों में सबसे ख़ास फायदा ये था कि उनकी ऊर्जा में बढ़ावा हुआ, जो कैफीन के कई प्रभाव की तुलना से अधिक थी.
दूसरी तरफ इसके प्रभाव के कारण शरीर और हाथ-पैरों में ठंड लग रही थी. इसके बाद भी कई एथलीट्स व्यायाम के बाद ठंडे पानी से नहाने के समर्थन में हैं.
ठंडे पानी से नहाने पर व्यायाम के बाद होने वाले दर्द में आराम मिलता है. लेकिन ये काम करता है कि नहीं इस पर वैज्ञानिकों के पास कोई सबूत नहीं है.
कुछ अध्ययन कहते हैं कि इससे स्वास्थ्य में सुधार होता है लेकिन कुछ कहते हैं कि ये मांसपेशियों को अनुकूल बनाने की क्षमता को कम करता है.
2014 में फिज़िकल थैरेपी इन स्पोर्ट में एक अध्ययन छपा था, जिसमें पाया गया कि ठंडे और गर्म पानी से नहाने के बीच कोई अधिक अंतर नहीं है.

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क्या ये सच में वसा को कम करता है?
ये सबसे अधिक सुना जाता है कि ठंडे पानी से नहाने पर शरीर में जमा हो रखी वसा को एक्टिव कर सकता है यानि एक्सट्रा फैट को कम करता है.
दुर्भाग्य से डॉ टोलेकेन कहते हैं कि इस बारे में बहुत कम ही साक्ष्य है.
कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि ठंडे पानी से नाहना स्पर्म प्रॉडक्शन के हक़ में होता है. गर्म पानी से नहाते वक़्त आपके अंडकोष का तापमान बाधित होता और इससे स्पर्म काउंट पर सीधा असर पड़ता है.
अगर आपके आहार में वसा की मात्रा ज़्यादा है तो स्पर्म काउंट में निश्चित तौर पर गिरावट आती है.
अंत में...
डॉ टोलेकेन के अनुसार, ठंडे पानी से नहाने के फ़ायदों के लिए वैज्ञानिक शोध अभी शुरूआती चरण में ही है और इसके अभी कोई पूरे साक्ष्य नहीं हैं.
लेकिन उनका मानना है कि अगर ठंडे पानी से नहाने पर ठंड लगने के अलावा और कोर्ई नुकसान नहीं होता है तो ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है. ख़ासकर तब जब लोगों को लगता है कि ये काम करता है.
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