इंसान ही नहीं कुत्तों और भेड़ियों को भी नहीं पसंद भेदभाव

इमेज स्रोत, ROOOBERT BAYER
जी हां, कुत्ते और भेड़िए को भी भेदभाव पसंद नहीं है. इसे जानकर आपको हैरान नहीं होना चाहिए क्योंकि यह बात पूरी तरह से सच है और शोध पर आधारित है.
शोध में सामने आया ये सच
कुत्तों के बारे में अब तक माना जाता था कि भेदभाव नापसंद करने का गुण उनके अंदर इंसानों के साथ रहने की वजह से आया है, लेकिन यह रिसर्च इस बात को ग़लत साबित करती है.

इमेज स्रोत, ROOOBERT BAYER
इस रिसर्च में झुंड में रहने वाले एक कुत्ते और एक भेड़िए को अलग-अलग पिंजरों में रखा गया. इन पिंजरों में एक घंटी लगाई गई जिसे बजाने पर दोनों को कुछ इनाम मिला.
कई बार ऐसा हुआ कि कुत्ते और भेड़िए दोनों ने समान कार्य किए लेकिन सिर्फ़ किसी एक को इनाम मिला. रिसर्च में सामने आया कि जब दोनों में से किसी एक को बड़ा इनाम मिला तो दूसरे ने काम करने से इनकार कर दिया.
विएना में यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी मेडिसिन की जेनिफर एसलर कहती हैं, "जब भेदभाव ज़्यादा होता था तो वे काम करना बंद कर देते थे, कुछ के मामलों में यह प्रतिक्रिया बहुत जल्दी ही देखने को मिली.''
उन्होंने कहा, ''एक भेड़िये को जब तीसरी बार काम करने के बाद भी कुछ नहीं मिला तो उसने काम करना बंद कर दिया, मुझे लगता है कि वो इतना ग़ुस्से में था कि उसने पिंजड़े में लगी घंटी को ही तोड़ दिया."

इमेज स्रोत, ROOOBERT BAYER
पूर्वजों से मिली भेदभाव बर्दाश्त न करने की सीख
जेनिफर कहती हैं, "ये बात ज़्यादा ठीक जान पड़ती है कि दोनों जानवरों में ये ज्ञान किसी साझा पूर्वज से आया हो. न कि ये ज्ञान दो बार आया है या ये इंसानों के साथ रहने की वजह से आया है."
हालांकि, ऐसा नहीं है कि कुत्तों पर इंसानों का ज़रा भी असर नहीं पड़ा. जेनिफर कहती हैं, "पालतू कुत्ते झुंड में रहने वाले कुत्तों के मुक़ाबले थोड़े ज्यादा सहनशील हो जाते हैं"
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












