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लिब्रहान रिपोर्ट पर आरोप प्रत्यारोप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. उल्लेखनीय है कि जस्टिस लिब्रहान ने 17 वर्षों के बाद मंगलवार को अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी थी. हालांकि अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है. कांग्रेस पार्टी ने 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस पर रिपोर्ट पेश किए जाने के लिए लिब्रहान आयोग की तारीफ़ की है तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने 17 वर्षों बाद रिपोर्ट पेश किए जाने के लिए आयोग की आलोचना की है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इस रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि लिब्राहन आयोग ने पूरी मेहनत से तैयार की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. उनका कहना था कि सरकार इसका अध्ययन करके ज़रूरी कदम उठाएगी. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा कि विध्वंस में संघ परिवार की भूमिका कोई छुपी हुई नहीं है. भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आयोग की रिपोर्ट पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन रिपोर्ट की पेश किए जाने के वक्त पर ज़रूर सवाल उठाया. उनका कहना था कि ये समय जानबूझकर चुना गया लगता है और इससे राजनीतिक साजिश का संकेत मिलता है. प्रतिक्रियाएँ भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने 17 साल बाद रिपोर्ट पेश किए जाने पर सवाल उठाया. उनका कहना था कि जिन भाजपा नेताओं को आयोग ने बुलाया वे सभी उसके समक्ष पेश हुए. उनका कहना था कि करोड़ों हिंदुओं की इच्छा है कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बने और इस समस्या का रचनात्मक निदान निकले. उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की माँग की है. उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद कांग्रेस के शासनकाल में ढहाई गई थी इसलिए भाजपा के साथ साथ कांग्रेस पार्टी की भूमिका भी ठीक तरह से उजागर की जानी चाहिए. उनका कहना था कि जांच में इतना समय लगाना उचित नहीं है, इससे आयोगों में जनता का विश्वास कम होता है, साथ ही ये धन की बर्बादी है. बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के संयोजक जफ़रयाब जिलानी ने लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है. उनका कहना था कि भले ही रिपोर्ट में देरी हुई है लेकिन देश के लिए ये अहम है. इससे पता चलेगा कि किसने देश का क़ानून तोड़ा और वे लोग कौन हैं. जफ़रयाब जिलानी का कहना था कि राजनीतिज्ञों पर तो लखनऊ और रायबरेली में मुक़दमे चल रहे हैं लेकिन नौकरशाहों की ज़िम्मेदारी तय होनी बाकी है. लंबा कार्यकाल उल्लेखनीय है कि लिब्रहान आयोग को इस बात की जाँच करनी थी कि किन परिस्थितियों में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई.
इसे 16 मार्च, 1993 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन उसके बाद लगातार इसकी अवधि बढ़ाई जाती रही. इसे पिछला विस्तार पिछले वर्ष मार्च में मिला था. इस आयोग ने 400 बैठकें कीं और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बयान दर्ज किए थे. ग़ौरतलब है कि अयोध्या विवाद भारत के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और देश की राजनीति को एक लंबे अरसे से प्रभावित करता रहा है. भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों का दावा है कि हिंदुओं के आराध्य राम का जन्म ठीक वहीं हुआ जहाँ बाबरी मस्जिद थी. उनका दावा है कि बाबरी मस्जिद दरअसल एक मंदिर को तोड़कर बनवाई गई थी और इसी दावे के कारण छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई. इसके बाद देश भर में दंग भड़क उठे थे जिसमें हज़ारों लोग मारे गए थे. |
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