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मंत्रिमंडल विस्तार गुरुवार को संभव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल का पहला संभावित विस्तार मंगलवार को टाल दिया. ख़बरें हैं कि अब मंत्रिमंडल विस्तार गुरुवार को हो सकता है. वैसे तो इस विस्तार में सबसे बड़ी बाधा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके का सरकार में शामिल होने को लेकर असमंजस माना जा रहा था. लेकिन एक दिन पहले ही यानी सोमवार की शाम ही डीएमके ने सरकार में शामिल होने की घोषणा करके इन अटकलों पर विराम लगा दिया था. लेकिन कहा जा रहा है कि पंजाब में पैदा हुए तनाव और पश्चिम बंगाल में समुद्री तूफ़ान से हुई तबाही के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार टाल दिया गया. वैसे ख़बरें हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार टालने की असल वजह कुछ और है. ख़ुद कांग्रेस पार्टी में राज्यवार प्रतिनिधित्व को लेकर असमंजस की स्थिति है और साफ़ नहीं हो पा रहा है कि किस मंत्री को कौन सा मंत्रालय मिलने वाला है. मंत्रिमंडल की माथापच्ची कांग्रेस पार्टी के भीतर मंत्री पद पाने वाले नेताओं के मंत्रालयों पर सहमति न बन पाना भी विस्तार टलने का एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. इसके अलावा कांग्रेस चाहती है कि यूपीए के सभी घटक दलों को और जिन निर्दलीयों ने सरकार को समर्थन दिया है, उनको भी मंत्रिमंडल में जगह मिल जाए. लेकिन जिस तरह से डीएमके ने मंत्रिमंडल में सात सीटें हासिल की हैं, उससे दूसरे सहयोगी दलों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं और तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी जैसे दलों ने भी दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है. अब मंत्रिमंडल विस्तार की अगली संभावित तिथि 28 मई यानी गुरुवार बताई जा रही है क्योंकि 27 मई देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि है और उस दिन विस्तार संभव नहीं होगा. मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर डॉक्टर मनमोहन सिंह की सोनिया गांधी और अहमद पटेल के साथ बैठक हुई और इसी मामले पर माथापच्ची होती रही कि किसे कौन सा मंत्रालय दिया जाए. ज़ाहिर है ये तय होने के बाद ही मंत्रिमंडल का अगला विस्तार संभव हो सकेगा. इससे पहले सरकार के कुछ मंत्रियों ने धीरे-धीरे सभी ने कार्यभार सँभाल लिया है. इनमें प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और कृषि मंत्री शरद पवार के नाम प्रमुख हैं. |
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