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शनिवार, 09 मई, 2009 को 12:04 GMT तक के समाचार
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'श्रीलंकाई तमिलों को समान हक़ मिलें'
मनमोहन सिंह
श्रीलंकाई तमिलों की स्थिति को तमिनाडु में राजनीतिक दलों में बहुत ज़ोरशोर से उठाया है
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि 'पूर्व में भारत ने श्रीलंका के सैनिकों को प्रशिक्षण दिया और उपकरण उपलब्ध कराए थे लेकिन ये सुनिश्चित किया गया है कि उपकरणों का इस्तेमाल इस संघर्ष में न हो.'

तमिलनाडु के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने 'केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को ख़ास आदेश दिए थे कि भारतीय हथियारों का इस्तेमाल इस संघर्ष में न किया जाए.'

जब उनसे स्पष्ट पूछा गया कि क्या वे अन्नाद्रमुक से भविष्य में गठबंधन से इनकार करते हैं तो मनमोहन सिंह का कहना था, "इस समय हम डीएमके के साथ ये चुनाव लड़ रहे हैं और ये गठबंधन पिछले पाँच साल से पुख़्ता गठबंधन साबित हुआ है और जब हम सरकार बनाएँगे तब भी रहेगा."

 इस समय हम डीएमके के साथ ये चुनाव लड़ रहे हैं और ये गठबंधन पिछले पाँच साल से पुख़्ता गठबंधन साबित हुआ है और जब हम सरकार बनाएँगे तब भी रहेगा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता के बारे में उन्होंने दोहराया, "पिछले पाँच साल से समग्र वार्ता चल रही थी लेकिन मुंबई हमलों के बाद वार्ता शुरु करने से पहले भारत की न्यूनतम माँग है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों से संबंधित दोषियों को सज़ा दिलाए."

क्षेत्रीय दलों के भारत के विकास के रास्ते में विघ्न बनने की उनकी टिप्पणी के बारे में उनका कहना था, "भारत की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की मौजूदगी एक सच्चाई है और आगे भी रहेगी. मैने पहले यही कहा था कि कभी-कभी जब बहुत सारे दल हों तो देश में विकास की गति प्रभावित होती है."

शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में लालू यादव और रामविलास पासवान की ग़ैर-मौजूदगी की अटकलों को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हल्के में लिया कहा मीडिया ऐसी रिपोर्टों से सनसनी फैलाने की कोशिश करता है. उनका कहा था कि बैठक में तो चिदंबरम और मणिशंकर अय्यर भी शामिल नहीं हो पाए थे.

 भारत की राजनीति में क्षेत्रिय दलों की मौजूदगी एक सच्चाई है और आगे भी रहेगी. मैने पहले यही कहा था कि कभी-कभी जब बहुत सारे दल हों तो देश में विकास की गति प्रभावित होती है
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा के हाल में नौकरियाँ अमरीका से बाहर भेजने वाली कंपनियों को दी चेतावनी पर मनमोहन सिंह का कहना था कि ऐसे कदम अमरीकी कंपनियों को ही नुकसान पहुँचाएंगे और जल्द ही अमरीका भी इस बात को समझ जाएगा.

'तमिलों के लिए बराबरी, सम्मान'

श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग तमिल ईलम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता श्रीलंका में तमिलों को राहत और खाद्य सामग्री पहुँचाना और वहाँ युद्ध ख़त्म करना है. हम चाहते हैं कि तमिलों को श्रीलंका में समानता के साथ-साथ इज़्ज़त और सम्मान की ज़िंदगी व्यतीत करने का हक़ होना चाहिए. हमारा रुख़ यही रहा है कि इस समस्या का हल अविभाजित श्रीलंका में खोजना चाहिए."

 पूर्व में भारत ने श्रीलंका के सैनिकों को प्रशिक्षण दिया और उपकरण उपलब्ध कराए लेकिन ये सुनिश्चित किया गया है कि हथियारों का इस्तेमाल इस संघर्ष में न हो. इस बारे में मैंने विशेष आदेश केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को भी दिए थे
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के साथ श्रीलंका सेना के संघर्ष के मुद्दे पर तमिलनाडु में हो रही राजनीति पर मनमोहन सिंह का कहना था, "मुझे पता नहीं लोग किस तरह से बड़े बड़े वादे कर रहे हैं. क्या हो सकता है या नहीं हो सकता की अटकलों से बाहर आएँ. श्रीलंका एक संप्रभु देश है और ये कोई विकल्प नहीं कि हम प्रभुसत्ता संपन्न देशों में अपनी फ़ौजें भेज दें."

एलटीटीई और उसके प्रमुख प्रभाकरण के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि एलटीटीई भारत में प्रतिबंधित संगठन है और प्रभाकरण वांछित व्यक्ति हैं.

उनका कहना था कि श्रीलंका की समस्या का केवल सैन्य समाधान नहीं हो सकता और वहाँ तमिल समस्या का समग्र राजनीतिक हल खोजा जाना चाहिए.

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