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वरुण पर रासुका लगाने का फ़ैसला अवैध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगाने को अवैध ठहराया गया है. वरुण पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. उत्तर प्रदेश के सलाहकार बोर्ड ने वरुण गाँधी के मामले में बुधवार को यह फ़ैसला सुनाया है. इस बोर्ड के सदस्यों में उच्च न्यायालय के एक जज और दो सेवानिवृत जज होते हैं. ये बोर्ड इस बारे में सलाह देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगाने का फ़ैसला कितना सही है. बोर्ड ने इस मामले में कहा है कि एनएसए बहुत कठोर क़ानून और वरुण के मामले में इसे लागू करने का पर्याप्त आधार नहीं है. सरकार की दलील थी कि वरुण के भाषण से पीलीभीत में क़ानून और शांति कायम करने में मुश्किल हो सकती है लेकिन वरुण का कहना था कि ये मामला राजनीति से प्रेरित है. एक सरकारी अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि सरकार बार्ड का फ़ैसला पढ़ने के बाद ही इस पर कार्रवाई का अंतिम निर्णय लेगी लेकिन संभावना ये है कि सरकार जल्द हार मानने वाली नहीं है और सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दे सकती है. मायावती सरकार को झटका जब वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ मार्च में आरोप लगे थे तो उन्होंने पीलीभीत की स्थानीय अदालत के समक्ष समर्पण किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद वरुण गाँधी को सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को इस शर्त पर रिहा किया था कि वे कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे. इसके बाद उनकी रिहाई की अवधी बढ़ा दी गई थी. इस आदेश के बाद वरुण के वकील मुकुल रोहतगी ने मीडिया को बताया, "हम पहले से कह रहे थे कि वरुण के ख़िलाफ़ एनएसए लगाना अनुचित है. अब उच्च न्यायालय के जजों के स्तर से ये फ़ैसला आया है. वरुण का बेदाग़ होने का दावा सही साबित हुआ है." इस आदेश को मायावती सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है. पर्यवेक्षकों के मुताबिक मायावती सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख़ अपना कर एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी. महत्वपूर्ण है कि जहाँ कांग्रेस कह रही है कि ये कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, वहीं भाजपा ने शुरु से ही एनएसए लगाए जाने को ग़लत ठहराया था और कहा था कि वह इसका विरोध करेगी. |
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