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वरुण मामले पर राजनीति गरमाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के चुनाव आयोग के वरुण गांधी को भड़काऊ भाषण देने का दोषी पाने के बाद राजनीति गरमाई है. जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं वहीं कांग्रेस और सीपीआई ने इसका स्वागत किया है. वरुण गांधी पर एक भाषण के ज़रिए मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है. पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार 29 वर्षीय वरुण गांधी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते हैं. वे अपने ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को ये कहते हुए ख़ारिज कर चुके हैं कि उनके 'भाषण की वीडियो रिकॉर्डिंग में छेड़छाड़ की गई है.' चुनाव आयोग के निर्देश पर पीलीभीत में उनके विरुद्ध भड़काऊ भाषण देने के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस की जाँच जारी है. वरुण गांधी को गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ अग्रिम ज़मानत मिल चुकी है. उधर चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने रविवार को बीबीसी को बताया, "हमने रिकॉर्डिंग की पूरी जाँच कराई है और इसे सही पाया गया." चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी को सलाह दी है कि वह उन्हें उम्मीदवार न बनाए. भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं बीबीसी हिंदी के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि भाजपा ख़ासी मुश्किल स्थिति में है. उनका कहना है कि चाहे भाजपा ने अभी इस मुद्दे पर फ़ैसला लेना है लेकिन भाजपा के लिए वरुण मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ना मुश्किल होगा. संजीव श्रीवास्तव मानते हैं, "सिद्धांतिक तौर पर भाजपा के प्रथम और दूसरी पंक्ति के कई नेता और संघ परिवार का एक वर्ग पहले भी ऐसी बातें कर चुका है. लेकिन भाजपा के मुस्लिम नेताओं ने जो आपत्ति जताई है और जिस तरह भाजपा अपना जनाधार बढ़ाकर विभिन्न समुदायों को साथ लेकर चलना चाहती है, उस संदर्भ में ये देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा कौन सी राह पकड़ती है." उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने मध्यमार्ग अपनाते हुए भाजपा को सुझाव देकर गेंद पार्टी के पाले में फेंक दी है, हालाँकि जब ये घटना हुई तब जनप्रतिनिधित्व क़ानून के तहत आचार संहिता लागू नहीं हुई थी. भाजपा ने सवाल उठाए, कांग्रेस-सीपीआई संतुष्ट भाजपा नेता बलबीर पुंज ने कहा, "वरुण के ख़िलाफ़ आरोप लगे हैं लेकिन उन्होंने इनका खंडन किया है. उन्होंने जो कहा है कि उसकी जाँच किसी निष्पक्ष व्यक्ति को करनी चाहिए. यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन पूरे मामले पर पहले ही निर्णय देना उचित नहीं है. हम इस मामले पर पार्टी के भीतर चर्चा करेंगे." उधर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना था कि वे जानना चाहते हैं कि चुनाव आयोग ने भाजपा को किस नियम के तहत वरुण गांधी को उम्मीदवार न बनाने की सलाह दी है. पुंज का कहना था कि उनकी जानकारी में नहीं है कि भाषण और सीडी मामले में क्या जाँच की गई है. उधर कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने समाचार एजेंसियों को बताया कि ये लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है. भाजपा पर तीखे प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, "भाजपा चुनाव से पहले वोटरों को एक वर्ग को लुभाने के लिए एक प्रयोग करना चाहती थी लेकिन वह असफल रही है. देश में विरोध के बावजूद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर चुप रहा और इसका मतलब भाजपा नेतृत्व की इस मामले में सहमति थी." एक अन्य कांग्रेस नेता जयंती नटराजन ने कहा, "यह नैतिक जीत है और भाजपा इससे सबक सीखेगी." भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने कहा, "ये केवल कोई तकनीकी मामला नहीं है. कब तक हम फ़ोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार करेंगे. भारतीय लोकतंत्र और जनता इतनी समझदार है कि वरुण गांधी की टिप्पणी का आशय समझ सके." |
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