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वरुण ने ज़मानत याचिका वापस ली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता और लोकसभा के प्रत्याशी वरुण गाँधी ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी ज़मानत अर्ज़ी वापस ले ली है. उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने वाले उनके भाषण के मामले में चुनाव आयोग के निर्देश पर पीलीभीत के ज़िलाधिकारी ने उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई थी. वरुण के वकील रयान करंजेवाला ने शुक्रवार को अदालत में अर्ज़ी दी कि 29 वर्षीय नेता वरुण गाँधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के दृष्टिगत अपनी ज़मानत की याचिका वापस लेना चाहते हैं. अदालत पहले ही एफ़आईआर को ख़त्म करने की उनकी याचिका को खारिज़ कर चुकी है. न्यायाधीश रेवा क्षेत्रपाल ने उनकी इस अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी. अदालत ने कहा, "इस मामले की गहराई में जाए बिना यह याचिका रद्द की जाती है." चुनावी रणनीति इसके साथ ही अदालत के ग़िरफ़्तारी के आदेश पर 20 मार्च को लगाई गई रोक भी हटाई गई है. शुक्रवार को वरुण की अग्रिम ज़मानत का अंतिम दिन है जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 मार्च को मंज़ूरी दी थी. जानकारों का कहना है कि वरुण अब शनिवार को पीलीभीत की अदालत में जाकर अपनी ग़िरफ़्तारी देंगे जिसे भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. वरुण गांधी पर आरोप है कि उन्होंने गत छह मार्च को अपने चुनाव क्षेत्र पीलीभीत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिया था. वरुण गांधी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि उन्होंने ऐसा भाषण कभी दिया ही नहीं था और उनके भाषण की जो सीडी जारी की गई है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है. याचिका ख़ारिज वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पुत्र 29 वर्षीय वरुण गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग के निर्देश पर पीलीभीत के ज़िलाधिकारी ने एफ़आईआर दर्ज करवाई थी. वरुण गांधी के ख़िलाफ़ बारखेड़ा पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज किया गया है. उनके ख़िलाफ़ धार्मिक उन्माद भड़काने और सरकारी आदेश की अवज्ञा के आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा उनके ख़िलाफ़ जनप्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 124 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. वरुण गांधी ने गत 19 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में अपील की गई थी कि उनके ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर को ख़त्म किया जाए. लेकिन हाईकोर्ट में न्यायाधीश इम्तियाज़ मुर्तज़ा और एससी निगम की एक पीठ ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथमदृष्टया यह मामला सही प्रतीत होता है इसलिए एफ़आईआर को ख़त्म नहीं किया जा सकता. पीलीभीत से पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे वरुण गांधी के कथित बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. भाजपा ने चुनाव आयोग का यह सुझाव मानने से इनकार कर दिया कि वरुण गांधी को पीलीभीत से पार्टी उम्मीदवार न बनाया जाए. |
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