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सोनिया गांधी ने रायबरेली से पर्चा भरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से अपना नामांकन पत्र अत्यंत सादगी के साथ दाख़िल किया. सोनिया गांधी कड़ी सुरक्षा वयवस्था के बीच दोपहर क़रीब साढ़े बारह बजे रायबरेली ज़िला कलेक्ट्रेट पहुँचीं और निर्वाचन अधिकारी को अपना नामांकन पत्र सौंप कर वापस लौट गईं. उन्होंने अपना नामांकन पत्र चार सेटों में दाख़िल किया. ज़िला कांग्रेस के अध्यक्ष उमाशंकर मिश्र, विधायक राजाराम त्यागी, अशोक सिंह और शिवगणेश उनके प्रस्तावक हैं. कड़ी सुरक्षा इस अवसर पर उनके साथ उनके पुत्र और कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा भी मौजूद थे. नामांकन पत्र के साथ दाख़िल किए गए हलफ़नामे के मुताबिक़ सोनिया गांधी के पास कुल एक करोड़ 38 लाख रुपए की संपत्ति है. सोनिया गांधी के नामांकन को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए थे. कलक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के अलावा किसी और को नहीं जाने दिया गया. प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर के बाहर लगे कांग्रेस के झंडे-बैनर को भी उतरवा लिया. इस सख़्ती पर स्थानीय पत्रकार हैरान थे लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और सोनिया गांधी के बीच जारी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को देखते हुए इसका अनुमान लगाया जा सकता था. नामांकन दाख़िल करने के लिए सोनिया गांधी अमेठी के मुँशीगंज के गेस्ट हाउस से सड़क मार्ग से होते हुए रायबरेली पहुँची. रास्तें में जगह-जगह लोगों ने उनका स्वागत किया. नामांकन से पहले उन्होंने रायबरेली ज़िला कांग्रेस के कार्यालय में हवन-पूजन भी किया. वापस जाते समय सोनिया मीडिया कर्मियों की ओर मुख़ातिब हुईं लेकिन तभी एक अधिकारी ने उन्हें बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों से बातचीत पर रोक हैं, इसके बाद वे वापस लौट गईं. सोनिया गांधी पहले अमेठी से सांसद थीं लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी सीट राहुल गांधी को सौंपकर ख़ुद रायबरेली से चुनाव लड़ने चली गईं. परंपरागत सीट गांधी परिवार की परंपरागत सीट रायबरेली से इंदिरा गांधी 1967 से चुनाव जीतती आई थीं लेकिन 1977 के जनता पार्टी की लहर में वो चुनाव हार गईं थीं. इंदिरा गांधी यहाँ से 1980 में फिर से सांसद चुनी गईं. स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि रोयबरेली से सोनिया गांधी को जीतने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. सोनिया गांधी ने 2004 के चुनाव में रायबरेली से दो लाख 17 हज़ार वोट से जीती थी. उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे सभी 15 नेताओं की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी. भाजपा के तेज़-तर्रार नेता विनय कटियार को केवल छह हज़ार वोट ही मिले थे. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रायबरेली से राकेश बहादुर सिंह को मैदान में उतारा है. वो विश्व हिंदू परिषद से भाजपा में आए हैं और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से नज़दीकियों की वजह से उन्हें टिकट मिल गया है. उनके उम्मीदवार बनने से भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराज़गी है. प्रदेश में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पड़ोसी ज़िले के आरएस कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है. वे उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद के अध्यक्ष हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला हुआ है. कुशवाहा पिछले छह महीने से रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में अपना जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पड़ोसी भाईचारा नष्ट करना चाहते हैं'04 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'बच्चों को प्रताड़ित करना शर्मनाक'05 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस सोनिया की पार्टी नेताओं को सलाह25 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस महिलाओं के हाथ में सत्ता की चाबी08 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस आडवाणी के निशाने पर फिर मनमोहन24 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'मनमोहन सिंह ही होंगे प्रधानमंत्री'24 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस राहुल गांधी ने अमेठी से भरा पर्चा 04 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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