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वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने मेनका गाँधी के पुत्र और आगामी लोक सभा चुनाव के लिए पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगाया है. उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के प्रधान सचिव विजय शंकर पाँडे ने लखनऊ में रविवार को पत्रकार सम्मेलन में बताया कि वरुण गाँधी को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत एहतियाती हिरासत में रखा गया है. वरुण गाँधी पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगाए जाने के बाद अब उनके लिए जेल से बाहर आना या ज़मानत हासिल करना पहले से अधिक कठिन हो जाएगा. भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के इस क़दम पर कड़ी आपत्ति जताई है और कहा है कि वो क़ानूनी रास्ता अपनाएगी. पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, '' इस समय देश में कोई इमरजेंसी नहीं लगी है कि किसी राजनेता के ख़िलाफ़ रासुका लगा दिया जाए. हम क़ानूनी रास्ता अख्तियार करेंगे और इसका विरोध करेंगे.'' वरुण गाँधी को मार्च के प्रथम सप्ताह में मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में पीलीभीत की स्थानीय अदालत में समर्पण किया था जिसके बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. सोमवार को उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई होनी है. वरुण गांधी के आत्मसमर्पण के दौरान काफ़ी हिंसा हुई थी जिसमें कई लोग घायल हो गए थे और इसी के मद्देनज़र उनके ख़िलाफ़ रासुका लगाया गया है. भारतीय निर्वाचन आयोग के आदेश पर प्रशासन ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने के मामले में वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा दर्ज किया गया है. अनेक मामले इससे पहले वरुण गाँधी और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ स्थानीय प्रशासन ने शनिवार की घटना के बाद एक और आपराधिक मामला दर्ज कराया. वरुण गाँधी और उनके समर्थकों पर हंगामा, बलवा, हत्या का प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने, धारा 144 और जनप्रतिनिधित्व क़ानून के उल्लंघन का मामला दर्ज कराया गया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भाजपा नेता कलराज मिश्र के ख़िलाफ़ भी धारा 144 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है. इस बात की चर्चा है कि अधिकारियों ने मामले इसलिए दर्ज कराए हैं ताकि चुनाव आयोग को सफ़ाई दी जा सके. इधर पीलीभीत में रविवार को स्थिति सामान्य रही लेकिन लोग सहमे हुए नज़र आए. पीलीभीत की सड़कों पर बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात है. प्रशासन और वरुण गांधी के समर्थकों में हुई झड़पों में लगभग 50 लोग घायल हो गए थे जिनमें से कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऐसा लग रहा है कि वरुण के मामले में हर पार्टी फूंक फूंक के कदम रखना चाहती है. भारतीय जनता पार्टी भी पीछे से उन्हें समर्थन देती नज़र आ रही है. भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी कलराज मिश्र पीलीभीत पहुँचे थे लेकिन वो उनके साथ अदालत नहीं गए. साथ ही इस मामले में मायावती सरकार और कांग्रेस भी सतर्क हैं. वे नहीं चाहते कि इस मुद्दे पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण हो. |
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