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'किसी को प्रधानमंत्री पेश नहीं करेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीपीएम नेता सीताराम येचुरी का कहना है कि तीसरा मोर्चा लोक सभा चुनाव से पहले किसी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश नही करेगा. आपकी बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब में सीताराम येचुरी ने कहा कि अगर तीसरा मोर्चा सरकार बनाने की स्थिति में आता है तो प्रधानमंत्री चुनने में तीसरे मोर्चे को कोई परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि 2004 के चुनाव में किसी ने नहीं सोचा था कि मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री होंगे लेकिन मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने और उन्होंने पाँच साल सरकार चलाई. उनके अनुसार सीपीएम सरकार में शामिल होगी या नहीं, इस सवाल पर चुनाव के बाद ही पार्टी मे विचार विमर्श के बाद फ़ैसला लिया जाएगा. वामदलों पर लगने वाले इस आरोप पर कि वो सरकार में शामिल इसलिए नहीं होते क्योंकि वो बिना जवाबदेही के सत्ता भोगना चाहते हैं, इस पर उनका कहना था कि वामदल बिना सत्ता के ज़िम्मेदारी निभाते हैं. उन्होंने कहा कि वामदलों ने बिना किसी सुविधा लिए लगभग साढे चार साल यूपीए का साथ दिया और उस दौरान एक ज़िम्मेदार पार्टी के तौर पर जनहित की नीतियों पर सरकार का साथ दिया और जनविरोधी नीतियों को रोका. सीताराम येचुरी ने दावा किया कि इस चुनाव में ज़बरदस्त ध्रुवीकरण होगा. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी कांग्रेस और बीजेपी की नीतियों से त्रस्त है. पार्टियों पर दबाव उनके अनुसार क्षेत्रीय पार्टियों पर उनके सामाजिक आधार का दबाव है कि वो एक वैकल्पिक सरकार के लिए प्रयास करें जिससे कि देश मे वैकल्पिक नीतियां लागू हो सकें. उन्होंने कहा कि न सिर्फ़ तीसरे मोर्च में शामिल पार्टियां साथ रहेंगी बल्कि चुनाव के बाद एनडीए और यूपीए के कई घटक दल तीसरे मोर्चे में शामिल होंगे. सीताराम येचुरी ने इस बात से इनकार नहीं किया कि एनडीए और यूपीए की कुछ पार्टियों से तीसरे मोर्चे के नेता संपर्क में हैं. तीसरे मोर्चे की नीतियों के बारे में उनका कहना था कि आर्थिक नीतियों में बदलाव, स्वतंत्र विदेश नीति, सामाजिक न्याय और आपसी भाईचारा ये तीसरे मोर्चे के आधारभूत मुद्दे हैं. लेकिन अगर तीसरा मोर्चा चुनाव के बाद सरकार बनाने के नज़दीक नहीं पहुँच पाता है तो क्या होगा, इस पर उनका कहना था कि तीसरा मोर्चा चुनाव जीतने के लिए मैदान मे उतरा है और अभी उनका लक्ष्य चुनाव में जीतना और एक वैकल्पिक सरकार बनाना है. बहुजन समाज पार्टी और जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक को लेकर उठ रहे संदेह के बारे में उनका कहना था कि ये दोनों ही पार्टियाँ तीसरे मोर्चे के साथ हैं. |
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