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भाजपा-कांग्रेस के ख़िलाफ़ तीसरा मोर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विकल्प के तौर पर तीसरे मोर्चे का गठन किया गया है. कर्नाटक में राजधानी बंगलौर से सटे टुमकूर में आयोजित एक जनसभा में तीसरे मोर्चे के गठन की औपचारिक घोषणा की गई. जनसभा में शामिल राजनीतिक दलों ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को एक 'नया विकल्प' देने के लिए वे एकत्र हुए हैं. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी दलों का देश में तीसरे मोर्चे के गठन के लिए एक साथ आना एक ऐतिहासिक क्षण है." धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई उन्होंने कहा, "तीसरा मोर्चा देश की जनता के लिए सांप्रदायिक ताक़तों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई के लिए खड़ा रहेगा और शोषित वर्गों की लड़ाई लड़ेगा." करात ने कहा कि भविष्य में कांग्रेस या भाजपा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्यूलर) के प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने तीसरे मोर्चे के गठन की घोषणा की थी. देवेगौड़ा के अनुसार तीसरे मोर्च में वामपंथी दलों समेत आठ पार्टियाँ पहले से ही शामिल हैं. ये पार्टियाँ हैं- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), फ़ॉरवर्ड ब्लॉक, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (आरपीआई), तेलुगूदेशम पार्टी (टीडीपी), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), अन्ना द्रमुक (एआईडीएमके) और जनता दल (सेक्यूलर). हालाँकि भाजपा और कांग्रेस ने इस मोर्चे से उन्हें किसी तरह का ख़तरे की बात को ख़ारिज किया है. बीएसपी भी साथ जनता दल (एस) के प्रवक्ता के अनुसार देवेगौड़ा ने ख़ुद मायावती को तीसरे मोर्चे में शामिल होने का निमंत्रण दिया था. बसपा के वरिष्ठ नेता और सांसद सतीश चंद्र मिश्र जनसभा में शामिल हुए. जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस और भाजपा ने बांटो और राज करो की नीति पर अब तक देश पर शासन किया है. इनकी सरकारों में अमीर और अमीर होते गए क्योंकि दोनों पार्टियां केवल औद्योगिक घरानों के लिए काम करती हैं. औद्योगिक घराने ही उन्हें चंदा देते हैं इसलिए इनकी नीतियाँ भी उन्हीं के हित में बनती हैं." उन्होंने कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती डॉक्टर आंबेडकर और कांशीराम के सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं. मिश्र ने कहा कि बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपने क़रीब-क़रीब सभी वादों को पूरा कर दिया है. राजनीतिक हैसियत राजनीतिक टीकाकारों की राय में बीएसपी के तीसरे मोर्चे से जुड़ जाने से आगामी लोकसभा चुनावों में इस मोर्चे की राजनीतिक हैसियत काफ़ी बढ़ जाएगी. समाचार एजेंसियों ने देवेगौड़ा के हवाले से कहा है कि उड़ीसा में सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी तीसरे मोर्चे में शामिल होने पर सहमति जताई है, लेकिन रैली में बीजेडी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ. दूसरी ओर तीसरे मोर्चे को शक्ल देने में अहम भूमिका निभाने वाली माकपा का भी कहना है कि और कई अन्य पार्टियाँ भी तीसरे मोर्चे में शामिल हो सकती हैं. पार्टी के एक नेता ने कहा, "ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कुछ धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ, जो विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और सत्ताधरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के साथ हैं, वे भी इस नई ताक़त के साथ जुड़ेंगी." टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू का भी कहना है कि नए मोर्चे में और पार्टियाँ शामिल हो सकतीं हैं. उन्होंने कहा, "तीसरा मोर्चा सरकार बनाएगी, आज की राजनीतिक स्थिति 1996 की स्थिति जैसी है, अभी तक प्रधानमंत्री पद के नाम पर कोई फ़ैसला नहीं हुआ है, मैं इस दौड़ में शामिल नहीं हूँ." देवेगौड़ा भी पहले ही कह चुके हैं कि अभी तक मोर्चे में इस बात पर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है कि किसे प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा और न ही इस बात पर कोई फ़ैसला हुआ है कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को इस पद के लिए आगे लाया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें तीसरे मोर्चे के गठन की घोषणा02 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस यूपीए के ख़िलाफ़ अभियान की घोषणा23 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस सीपीएम ने जताई तीसरे मोर्चे की ज़रूरत29 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगा तीसरा मोर्चा14 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस आठ क्षेत्रीय दलों ने मोर्चा बनाया 06 जून, 2007 | भारत और पड़ोस तीसरे मोर्चे की संभावना तलाशती सपा14 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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