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सीपीएम ने जताई तीसरे मोर्चे की ज़रूरत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत ने देश में तीसरे मोर्चे के गठन की ज़रूरत बताई है लेकिन कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से दूर रखना उसकी पहली प्राथमिकता है. सीपीएम के छह दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन प्रकाश कारत ने कहा कि वाम दलों के दबाव के कारण ही अब तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अमरीका के साथ 'सामरिक गठजोड़' और देश को 'अमरीकी सामरिक घेरे' से दूर रखने पर ध्यान केंद्रित करेगी. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी असैनिक परमाणु समझौता रोकने के लिए पूरा दम लगा देगी. तीसरा मोर्चा प्रकाश कारत ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकने के लिए सभी क़दम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि तीसरा विकल्प नीतियों के वैकल्पिक मंच पर आधारित होना चाहिए, न कि महज चुनावी गठबंधन. कारत का कहना था कि ऐसी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष पार्टियां हैं जो आर्थिक नीतियों, सामाजिक न्याय के उपायों और स्वतंत्र विदेश नीति पर वाम दलों से सहमत हो सकती हैं. इस अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन ने भी कहा कि यह वक्त है जब वाम दलों को कांग्रेस और भाजपा दोनों का लोकतांत्रिक विकल्प तैयार करने का हर प्रयास करना चाहिए. बर्धन ने कहा कि ऐसा वैकल्पिक कार्यक्रम जनता के मुद्दों पर साझा संघर्ष के ज़रिए ही उभर सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें वामपंथी दलों में तीसरे विकल्प पर चर्चा23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस संसद में उठा सीपीएम-आरएसएस मामला10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस झड़प के बाद कुछ भाजपा नेता नामजद09 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'कांग्रेस और भाजपा का विकल्प तैयार हो'20 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'चुनाव में व्हिप जारी करना ग़ैरक़ानूनी'17 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस आठ क्षेत्रीय दलों ने मोर्चा बनाया 06 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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