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पूर्वोत्तर श्रीलंका में लड़ाई तेज़ हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर श्रीलंका में सरकारी सेना और एलटीटीई के बीच लड़ाई तेज़ होने की ख़बर है. लड़ाई में आम नागरिकों के मारे जाने की रिपोर्टें भी आ रही हैं. श्रीलंका की सेना का कहना है कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ निर्णायक अभियान शुरू किया है. एलटीटीई के क़ब्ज़े वाले मुलईतिवू ज़िले में काम कर रहे एक वरिष्ठ सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर टी वर्थराजा ने बीबीसी को बताया है कि पिछले दो दिनों में लड़ाई के दौरान कम से कम 15 आम नागरिक मारे गए हैं और 100 से ज़्यादा घायल हैं. उन्होंने बताया कि नागरिकों के मारे जाने की कुछ घटनाएँ उन इलाक़ों में हुई जिसे सरकार ने सुरक्षित इलाक़ा घोषित किया हुआ है. सेना ने सुरक्षित इलाक़ों में हमले से इनकार किया है और एलटीटीई विद्रोहियों पर आरोप लगाया है कि वे इन इलाक़ों से गोलीबारी कर रहे हैं. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि फिर से शुरू हुई लड़ाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं. कार्रवाई दूसरी ओर सेना ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान उसकी कार्रवाई में 100 से ज़्यादा तमिल विद्रोही मारे गए हैं. दूसरी ओर एलटीटीई समर्थक एक वेबसाइट का दावा है कि विद्रोहियों ने सेना की कार्रवाई को नाकाम कर दिया है और 400 सैनिक मारे गए हैं. हालाँकि दोनों के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. पिछले कुछ महीनों से चल रही सैनिक कार्रवाई के कारण एलटीटीई को अपने क़ब्ज़े वाले कई इलाक़ों से हटना पड़ा है और अब वे मुलईतिवू ज़िले के जंगल में सिमट कर रह हए हैं. सैनिक अधिकारियों का कहना है कि अब उन्होंने आख़िरी और निर्णायक कार्रवाई शुरू की है. सेना ने उम्मीद जताई है कि अगले महीने तक सभी इलाक़े सरकार के नियंत्रण में आ जाएँगे. इस बीच सरकार ने मानवीय सहायता के लिए अस्थायी संघर्षविराम की मांग को ठुकरा दिया है. सरकार का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो एलटीटीई को फिर से संगठित होने का मौक़ा मिल जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका ने आईएमएफ़ से क़र्ज़ माँगा07 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस आम नागरिकों के मारे जाने की निंदा06 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस रेडक्रॉस ने 'मानवीय संकट' की चेतावनी दी04 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा ख़तरा'03 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका संघर्ष विराम पर विचार करे'28 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों के आख़िरी कस्बे के करीब सेना'24 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: युद्ध रोकने की अंतरराष्ट्रीय अपील24 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'संघर्ष विराम को तैयार' तमिल विद्रोही23 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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