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'श्रीलंका संघर्ष विराम पर विचार करे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा है कि श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने संघर्ष विराम का जो प्रस्ताव दिया है, उससे मिले मौके को भुनाना चाहिए. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा कि संघर्ष विराम के प्रस्ताव से लड़ाई के बीच फँसे निर्दोष लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिल सकती है. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत उत्तरी श्रीलंका में विस्थापितों की सहायता के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और दवा भेजने का प्रबंध कर रहा है. उन्होंने श्रीलंका में मानवीय संकट को गंभीर बताते हुए कहा कि स्थितियाँ बिगड़ती जा रही हैं. विदेश मंत्री ने उन रिपोर्टों का ज़िक्र किया जिनके मुताबिक संघर्ष क्षेत्र में 70 हज़ार नागरिक फँसे हुए हैं. 'अपील पर विचार हो' उनका कहना था, "ख़बर मिली है कि एलटीटीई ने संघर्षविराम की पेशकश की है. बहरहाल इसमें हथियार डालने की इच्छा नहीं जताई गई है, लेकिन हमारा विचार है कि लड़ाई रोकने के लिए श्रीलंका की सरकार को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए." उन्होंने कहा, "भारत सरकार श्रीलंका की सरकार से अपील करती है कि वह फंसे नागरिकों को तुरंत सुरक्षित निकालने पर काम करे." विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि श्रीलंका की सरकार और अन्य सभी लोग इस अपील पर विचार करेंगे. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सुरक्षित स्थान पर उपयुक्त पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों की उपस्थिति होनी चाहिए और वहां अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस की भी बिना रोकटोक पहुंच होनी चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'विद्रोहियों के आख़िरी कस्बे के करीब सेना'24 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: युद्ध रोकने की अंतरराष्ट्रीय अपील24 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'संघर्ष विराम को तैयार' तमिल विद्रोही23 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस एलटीटीई का दावा: हमला आत्मघाती था21 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो: यूएन19 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों को मदद की पेशकश18 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: ताज़ा संघर्ष में आम नागरिक मरे18 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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