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नागरिकों के लिए 'सुरक्षित मार्ग' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने कहा है कि उत्तर-पूर्व के युद्धक्षेत्र में फँसे हज़ारों नागरिकों को निकलने के लिए 'दो सुरक्षित मार्ग' देने की योजना बनाई गई है. विदेश सचिव डॉ पलिता कोहाना ने बीबीसी को बताया कि इन मार्गों से नागरिक युद्धक्षेत्र से बाहर निकाल सकेंगे. सरकार की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जबकि वहाँ फँसे नागरिकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. सहायता एजेंसियों का कहना है कि युद्धक्षेत्र में डेढ़ लाख लोग फँसे हुए हो सकते हैं. श्रीलंका सरकार पर संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और पड़ोसी देश भारत की ओर से बड़ा दबाव है कि वह अस्थाई युद्धविराम की घोषणा करे ताकि वहाँ फँसे हुए तमिल नागरिकों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा सके. सहायता एजेंसियों का कहना है कि सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रहे युद्ध में सैकड़ों नागरिक मारे जा चुके हैं. विदेश सचिव का कहना है कि सरकार ने जिन दो सुरक्षित रास्तों की योजना बनाई है वह उन इलाक़ों में है जिसे सरकार सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर चुकी है. उनका कहना था कि यदि नागरिक यहाँ से निकलना चाहें तो सेना इन इलाक़ों में गोलीबारी नहीं करेगी. डॉ कोहाना का कहना है कि सरकार की योजना से रेडक्रॉस सोसायटी को भी अवगत करवा दिया जाएगा. सरकार की इस योजना पर फ़िलहाल तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'श्रीलंका संघर्ष विराम पर विचार करे'28 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'संघर्ष विराम को तैयार' तमिल विद्रोही23 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस एलटीटीई का दावा: हमला आत्मघाती था21 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस कोलंबो पर एलटीटीई का हवाई हमला20 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: ताज़ा संघर्ष में आम नागरिक मरे18 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'आम लोगों को निशाना बना रहे हैं विद्रोही' 16 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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