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मंगलवार, 24 फ़रवरी, 2009 को 09:18 GMT तक के समाचार
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स्वात में तालेबान का संघर्षविराम
तालिबान चरमपंथी
स्वात घाटी में तालिबान चरमपंथियों का वर्चस्व हो गया है
पाकिस्तान की उत्तर पश्चिमी स्वात घाटी में तालेबान चरमपंथियों ने अनिश्चितकाल के लिए संघर्षविराम की घोषणा की है.

पिछले हफ्ते प्रशासन और कट्टर धार्मिक नेताओं के बीच हुए समझौता हुआ था जिसके तहत प्रशासन ने स्वात घाटी में शरीयत क़ानून को मानने और तालेबान ने संघर्षविराम की हामी भरी थी.

तालेबान कुछ दिनों से समझौते का आकलन कर रहा था और मंगलवार को इलाक़े में तालेबान नेता मौलाना फ़ज़लुल्लाह के नेतृत्व में हुई बैठक में अनिश्चितकाल के लिए संघर्षविराम की घोषणा की गई.

समाचार एजेंसी एएफपी ने इल क्षेत्र में तालेबान के प्रवक्ता मुस्लिम खान के हवाले से कहा, '' आज मौलाना फ़ज़लुल्लाह के नेतृत्व में शूरा की बैठक हुई और अनिश्चितकाल के लिए संघर्षविराम को लागू करने का फ़ैसला किया गया.''

उनका कहना था, '' हम सारे बंदियों को रिहा कर रहे हैं. आज हमने अर्धसैनिक बलों के चार सैनिकों को छोड़ा है और आने वाले दिनों में सभी सुरक्षाकर्मियों को रिहा कर देंगे. ''

इससे पहले तालेबान ने दस दिन के लिए संघर्षविराम की घोषणा की थी जिसकी मियाद बुधवार को ख़त्म हो रही है.

मौलाना फ़ज़लुल्लाह के ससुर और धार्मिक नेता सूफ़ी मोहम्मद सरकार और चरमपंथियों के बीच समझौते के लिए प्रयास कर रहे थे.

सोमवार को सूफ़ी मोहम्मद ने चरमपंथियों से अपील की थी कि वो सड़कों की गश्त बंद करें ताकि सरकार शरिया अदालतें स्थापित करने का काम शुरु कर सके.

स्वात घाटी में नवंबर 2007 से सरकारी सेनाओं और चरमपंथियों के बीच ख़ूनी संघर्ष होते रहे हैं जिसमें अब तक कम से कम 1200 आम नागरिक मारे गए हैं.

इस दौरान तालेबान ने क़रीब 200 स्कूलों को नष्ट कर दिया है. इनमें से अधिकतर स्कूल लड़कियों के थे.

इससे पहले 2008 के मध्य में सरकार और सेनाओं के बीच हुआ समझौता टूट गया था.

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट् का कहना है कि इस शांति समझौते को लेकर भी विशेषज्ञ बहुत अधिक आशान्वित नहीं हैं क्योंकि तालेबान केवल क़ानून नहीं बदलना चाहता है बल्कि स्वात घाटी पर भी पूर्ण नियंत्रण चाहता है.

चरमपंथ का विरोध करने वाले सूफ़ी मोहम्मद ने स्वात घाटी में अपने कई कार्यकर्ताओं के साथ शांति शिविर लगाया था और मौलाना फ़ज़लुल्लाह से बातचीत शुरु की थी.

कुछ दिनों पहले स्वात घाटी से लौटे बीबीसी संवाददाता एम इलियास खान का कहना है कि आने वाले दिनों में उम्मीद है कि चरमपंथी स्वात घाटी में विभिन्न चेक नाके बंद कर देंगे जो नई क़ानून प्रणाली को लागू करने की दिशा में पहला क़दम होगा.

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