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उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की मंगलवार को भारी हंगामे के साथ शुरुआत हुई और राज्यपाल टी राजेश्वर को भी अपना भाषण हंगामें की बीच ही देना पड़ा. मायावती सरकार ने विधानसभा अधिवेशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बंदोबस्त किए थे लेकिन मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के विधायक चोरी छिपे बड़े-बड़े बैनर विधानसभा में ले जाने में कामयाब रहे. राज्यपाल के सदन में आते ही विपक्षी विधायक सीटों पर खड़े हो गए और नेता विरोधी दल मुलायमसिंह यादव ने अपने पार्टी विधायकों का मनोबल बढ़ाने के लिए राज्यपाल पर पक्षपात का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अपराधों की बढोत्तरी और क़ानून व्यवस्था बदतर होने के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं जबकि इससे पहले उनकी सरकार के दौरान वो बात बात पर केंद्र को रिपोर्ट देते थे. राज्यपाल पर गोले इसी बीच विपक्षी विधायकों ने एजेंडे और विधानसभा के दूसरे कागज़ात को तोड़-मरोड़कर गोलों की तरह राज्यपाल पर फेंकना शुरू कर दिया. सुरक्षा कर्मियों ने उछल-उछल कर कागज़ के इन गोलों को रोकने की कोशिश की. कई विधायक अपनी सीटों पर खड़े थे और उनके हाथों में बैनर थे जिन पर मुख्यमंत्री मायावती पर अनेक तरह के आरोप लगाए गए थे. राज्यपाल टी राजेश्वर राव कुछ ही मिनट में वापस चले गए और सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई. सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और समाजवादी पार्टी के अंबिका चौधरी ने आपत्ति की कि राज्यपाल ने अपना भाषण पढ़ा ही नहीं इसलिए उसे पढ़ा हुआ न माना जाए. लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने इस आपत्ति को ख़ारिज कर दिया. इसके बाद कार्यवाही अगले दिन के लिए स्थगित हो गई. इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में विपक्ष के नेता मुलायम सिंह ने आरोप लगाया कि मायावती सरकार आंदोलन करनेवाले विपक्षी नेताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है. विधानसभा के इसी सत्र में मायावती सरकार अगले वित्तीय वर्ष का बजट पेश करेगी जिसे लोक सभा चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसे देखते हुए समाजवादी पार्टी ने शुरू से ही आक्रामक रुख़ अपनाया है. |
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