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मंगलवार, 06 जनवरी, 2009 को 17:21 GMT तक के समाचार
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मायावती के लिए एक और मुसीबत

अवध पाल सिंह यादव
अवध पाल सिंह यादव मायावती सरकार में मंत्री है
उत्तर प्रदेश में इंजीनियर हत्याकांड मामले को लेकर विवाद अभी थमा नहीं था कि राज्य सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री मायावती के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है.

पशुपालन और दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह यादव ने कहा है कि अगर डीपी यादव माफ़िया हैं तो फिर महात्मा गाँधी और दूसरे कई बड़े नेता भी माफ़िया हैं क्योंकि उनके ऊपर भी मुकदमे चले थे.

पत्रकारों से बातचीत में अवधपाल सिंह यादव ने कहा, '' मेरी नज़र में डीपी यादव कतई माफ़िया नहीं है. मैं उन्हें तब से जानता हूँ जब वह दूध का काम करते थे. वह आदमी कहीं से क्रिमिनल नहीं था, वह आदमी बहादुर हो सकता है और बहादुर को माफ़िया कहना, क्रिमिनल कहना मैं ठीक नहीं समझता.''

डीपी यादव पर अनेक आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह माफ़िया हैं. वे समाजवादी और भारतीय जनता पार्टी में रह चुके हैं . पिछला चुनाव वह निर्दलीय के रूप में जीते और हाल ही में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए हैं.

बयान का विरोध

अवध पाल सिंह यादव के बयान का कई संगठनों ने विरोध किया है

डीपी यादव का बचाव करते हुए पशुपालन मंत्री अवधपाल सिंह यादव का कहना था," यूँ तो इस देश में आप किसी को भी माफ़िया कह सकते हैं जिस पर चार मुकदमे चले हों. अगर चार मुकदमों के आधार पर माफिया होता है तो सबसे पाहले महात्मा गांधी माफ़िया लिखे जाएँगे, और सुभाष चंद्र बोस लिखे जाएँगे, पंडित जवाहर लाल नेहरू लिखे जाएँगे, लाल बहादुर शास्त्री लिखे जाएँगे. चौधरी चरण सिंह लिखे जाएँगे.''

अवधपाल सिंह यादव ने इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का भी नाम लिया. अवधपाल यादव पर ख़ुद ही दो दर्जन से अधिक मुकदमे हैं.

समाचार माध्यमों के ज़रिए मंत्री का बयान प्रसारित होने पर सामाजिक संगठनों और विरोधी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इन संगठनों ने इसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री मायावती को ज़िम्मेदार ठहराया है.

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, " गाली तो ये दिलवा रही हैं महात्मा गांधी को. गांधीजी की बदौलत ये सत्ता में बैठी हैं. गांधी न होते तो न इतनी जल्दी आज़ादी आती न यह मुख्यमंत्री बनतीं. आरक्षण में अंबेडकर का योगदान तो है ही पर गांधीजी का सहयोग नहीं होता तो आरक्षण भी नहीं होता."

भारतीय जनता पार्टी के नेता लालजी टंडन ने अवधपाल सिंह यादव की कड़ी आलोचना करते हुए उनके बयान को बहुत आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने अवधपाल पर गांधीजी के अपमान के लिए कानूनी क़दम उठाने की मांग की. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के समर्थकों ने उनकी प्रतिमा के नीचे धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया.

ये मामला तूल पकड़ता जा रहा है लेकिन मुख्यमंत्री मायवाती ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

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