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शनिवार, 07 फ़रवरी, 2009 को 18:42 GMT तक के समाचार
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आदमखोर बाघ को मारने का दावा

शेर (फ़ाइल फ़ोटो)
कड़े संरक्षण नियमों के कारण इन इलाक़ों बाघों की संख्या बढ़ी है
उत्तर प्रदेश में जंगल विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि आतंक मचाए हुए तीन बाघों में से एक को गोली मार दी गई है.

अधिकारियों का कहना है कि जिस बाघ को गोली मारी गई है उसे आदमखोर घोषित किया जा चुका था.

हालांकि अभी बाघ का शव नहीं मिला है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सुबह होने के बाद शव भी मिल जाएगा.

इस बाघ को को फ़ैजाबाद के पास जंगल में शनिवार को शाम पाँच बजे गोली मारी गई.

अधिकारियों का कहना है कि यह बाघ पीलीभीत से नदी के किनारे-किनारे पाँच सौ किलोमीटर चलकर यहाँ पहुँचा है और इसने अब तक पाँच लोगों की जान ली है.

वैसे प्रदेश के तीन बाघों ने कुलमिलाकर अब तक आठ लोगों की जान ली है. हालांकि इसमें से सिर्फ़ एक को आदमखोर घोषित किया गया था.

लंबा अभियान

इन तीन बाघों में से एक को फ़ैजाबाद के पास कुमारगंज के जंगलों में कामाख्या भवानी मंदिर के पास गोली मारी गई है.

 बाघ को 15 फ़ुट की दूरी से गोली मारी गई है
पीपी सिंह, वन अधिकारी

दुधवा रिज़र्व फॉरेस्ट के अधिकारी पीपी सिंह ने बीबीसी को बताया कि बाघ को 15 फ़ुट की दूरी से गोली मारी गई है और उन्हें विश्वास है कि निशाना ठीक लगा है और उसके बचने की संभावना नहीं है.

हालांकि उनका कहना है कि अँधेरा होने की वजह से बाघ का शव बरामद नहीं किया जा सका है लेकिन उन्होंने विश्वास जताया है कि सुबह शव ज़रूर मिल जाएगा.

इस बाघ को मारने के लिए जंगल विभाग ने बहुत लंबा अभियान चलाया.

देश भर के विशेषज्ञों को बुलवाकर इस बाघ को मारने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी.

राज्य के मुख्य वन्यजीव संरक्षक बीके पटनायक ने इस बाघ के बारे में पहले बताया था कि यह बाघ पीलीभीत के जंगलों में अपने निवास स्थान से पिछले साल नवंबर में निकला और पूर्वी उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद ज़िले में पहुँच गया.

इसके साथ एक बाघ और है लेकिन वह आदमखोर नहीं हुआ है.

ख़ौफ़

पिछले दो महीनों से उत्तर प्रदेश के हज़ारों लोग जंगल से भटक कर रिहायशी इलाक़ों में घुसे तीन बाघों के डर से सहमे हुए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि 'मारा गया बाघ' भी इन्हीं में से एक था.

इनके हमलों में अब तक कम से कम आठ लोग मारे जा चुके हैं और एक व्यक्ति घायल हुआ है.

ये बाघ राज्य के पाँच ज़िलों में भय का पर्याय बने हुए हैं.

तीन में से दो बाघों की यात्रा पश्चिमोत्तर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से शुरु हुई और इनका डर पूर्वी सीमा पर स्थित गाज़ीपुर ज़िले तक 800 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है.

तीसरा बाघ सीमावर्ती बिहार राज्य के जंगलों से उत्तर प्रदेश में घुसा है जो एक व्यक्ति को मार चुका है. हालाँकि इसे आदमखोर नहीं बताया गया है.

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