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बुधवार, 16 अप्रैल, 2008 को 18:55 GMT तक के समाचार
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बाघों को बचाने के लिए नई मुहिम
बाघ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में मात्र 1,411 बाघ बचे हैं
यूरोपीय संसद ने बाघों की घटती संख्या को देखते हुए एक नई रणनीति बनाने की बात कही है.

इसी मुहिम के तहत ब्रसल्स स्थित यूरोपीय संसद ‘टाइगर डे’ मना रहा है.

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में बाघों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में मात्र 1,411 बाघ बचे हैं.

वन्यजीवों पर काम करने वाले लोग बाघों के बढ़ते शिकार और बढ़ती आबादी को इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं.

उनका कहना है कि वन्यजीव अधिकारियों को बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

माफ़िया से ख़तरा

यूरोपीय संसद में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्ष नीना गिल इस बारे में और रोशनी डालती हैं.

वो कहती हैं कि ताज़े आंकड़ों के अनुसार साल 2025 तक बाघ के विलुप्त हो जाने का ख़तरा है.

नीना गिल कहती हैं कि भारत अकेले बाघों की घटती संख्या जैसे मसले से नहीं निपट सकता और वक्त आ गया है कि यूरोपीय संघ बाघों को बचाने के अंतरराष्ट्रीय अभियान में अपनी भूमिका निभाए.

 भारत अकेले बाघों की घटती संख्या जैसे मसले से नहीं निपट सकता और वक्त आ गया है कि यूरोपीय संघ बाघों को बचाने के अंतरराष्ट्रीय अभियान में अपनी भूमिका निभाए
नीना गिल, भारतीय प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख

उनके अनुसार एशिया महाद्वीप में बाघों के लगातार घटने का मुख्य कारण उसके अंगों का ग़ैरकानूनी व्यापार है.

शिकारी भारत में बाघों को मार कर उसके अंगों को नेपाल और फिर नेपाल के रास्ते चीन के बाज़ारों तक पहुंचाते हैं जहां उनकी बिक्री की जाती है.

चीन में बाघों की खाल और हड्डियों की भारी मांग हैं और उसे नौ सौ फ़ीसदी मुनाफ़े तक पर बेचा जाता है.

नीना गिल कहती हैं कि ओलंपिक की वजह से सारे विश्व का ध्यान चीन पर है और सभी को चीन पर दबाव बनाना चाहिए कि वो बाघों के अंगों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को नहीं हटाए.

शिकारियों की समस्या

इधर उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि उसने बाघ और चीते की 20 खालों को बरामद किया है.

ये बरामदगी राजधानी लखनऊ से 200 किलोमीटर दूर प्रतापगढ़ ज़िले में की गई.

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया है. इन दोनों का कहना है कि वे खालों को चोरी से नेपाल ले जा रहे थे.

बाघों की गिरती संख्या सरकार के लिए चिंता का विषय है.

ताज़े आंकड़ों के मुताबिक जहाँ 2002 में बाघों की संख्या 3,642 पाई गई थी, वहीं 2008 में ये संख्या गिरकर 1,411 हो गई है.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सौ साल पहले भारत में बाघों की संख्या 40 हज़ार के आसपास थी.

भारत में विश्व के 40 प्रतिशत बाघ रहते हैं और भारत के 17 प्रदेशों में बाघों के लिए 23 संरक्षित क्षेत्र हैं.

बाघबाघों पर गहराता संकट
भारत सरकार के अनुसार बाघों की संख्या 3500 से घटकर 1411 हो गई है.
बाघचीन की 'टाइगर वाइन'
अंतरराष्ट्रीय बाघ सम्मेलन में चीन की 'टाइगर वाइन' को लेकर आलोचना हुई है.
खाल का खुला बाज़ार
वन्य जीव संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की खाल की बिक्री बढ़ी है.
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मेघालय में बाघ को मारने का उत्सव क़ानूनी रोक के बावजूद जारी.
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