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शनिवार, 07 फ़रवरी, 2009 को 02:59 GMT तक के समाचार
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अमरीका ने पाकिस्तान से आश्वासन माँगा
क़दीर ख़ान
क़दीर ख़ान को पाकिस्तान के परमाणु बम का जनक माना जाता है
अमरीका ने कहा है कि वह पाकिस्तान से आश्वासन चाहता है कि विवादों में घिरे पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान ऐसी किसी गतिविधि में सक्रिय नहीं हैं जिसके कारण उन्हें घर पर नज़रबंद किया गया था.

अमरीका के साथ-साथ भारत, ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी इस बारे में चिंता जताई है.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को पाकिस्तान में अदालत के निर्देश पर 72 वर्षीय अब्दुल क़दीर ख़ान की नज़रबंदी हटा ली गई थी.

उन पर वर्ष 2004 में परमाणु तकनीकों और उपकरणों की जानकारी की लीबिया, उत्तर कोरिया और ईरान को तस्करी के आरोप लगे थे. लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने माफ़ी दे दी थी. तब से ही वे अपने घर पर नज़रबंद थे.

'पूछताछ नहीं करने दी'

 अमरीकी राष्ट्रपति और ये सरकार पाकिस्तान से आश्वासन चाहते हैं कि डॉक्टर ख़ान ऐसी किसी गतिविधि से संबंधित या उसमें सक्रिय नहीं हैं जिसके कारण उन्हें पहले घर पर नज़रबंद किया गया था
अमरीका

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा, "हमने क़दीर ख़ान की रिहाई कि रिपोर्टें देखी हैं लेकिन हमें अभी सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी मिलनी है. मौजूदा राष्ट्रपति ने कई बार परमाणु अप्रसार के बारे में अपनी चिंताओं को स्पष्ट किया है."

उनका कहना था, "जब तक हमें पाकिस्तान की सरकार इस बारे में रिपोर्ट मिलती है, (अमरीकी) राष्ट्रपति और ये सरकार पाकिस्तान से आश्वासन चाहते हैं कि डॉक्टर ख़ान ऐसी किसी गतिविधि से संबंधित या उसमें सक्रिय नहीं हैं जिसके कारण उन्हें पहले घर पर नज़रबंद किया गया था."

इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और अमरीका में विभिन्न उच्चस्तरीय अधिकारियों ने क़दीर ख़ान की रिहाई पर चिंता व्यक्त की थी.

अमरीका में प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के चेयरमैन हॉवर्ड बरमैन ने भी चिंता व्यक्त की है.

 पाकिस्तान ने परमाणु अप्रसार के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर सभी कदम उठा लिए हैं और एक्यू ख़ान का मामला हमारे लिए बंद अध्याय है
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय

उन्होंने कहा, "जब अमरीकी संसद अमरीका-पाकिस्तान संबंधों पर पुनर्विचार करती है या नई नीति बनाती है जिसके तहत पाकिस्तान को मदद दी जा सकती है, तो अमरीका इस बात को ध्यान में रखेगा कि अमरीकी अधिकारियों को क़दीर ख़ान से पूछताछ करने की इजाज़त नहीं दी गई थी."

अमरीका चाहता था कि उसे क़दीर ख़ान से पूछताछ करने दी जाए लेकिन पाकिस्तान ने इसकी अनुमति नहीं दी थी.

भारत की तीखी प्रतिक्रिया

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत ने इस विषय में तीखी प्रतिक्रिया दी है.

एक सवाल के जबाव में भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "हम केवल यही कह सकते हैं कि पाकिस्तान की सरकार ने व्यक्तियों और संगठनों को इस तरह से काम करने की इजाज़त दी है जिससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा ख़तरे में पड़ी है."

उधर ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को अब्दुल क़दीर ख़ान से सीधी बातचीत करने की सुविधा उपलब्ध कराए.

 हम केवल यही कह सकते हैं कि पाकिस्तान की सरकार ने व्यक्तियों और संगठनों को इस तरह से काम करने की इजाज़त दी है जिससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा ख़तरे में पड़ी है
भारतीय विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा

ब्रिटेन चाहता है कि आईएईए क़दीर ख़ान से कुछ मुद्दों पर जानकारी पा सके, विशेष तौर पर इस बारे में कि ईरान और उत्तर कोरिया को उन्होंने क्या गुप्त जानकारी उपलब्ध कराई है.

फ़्रांस ने कहा है कि वह इस फ़ैसले से कुछ चिंतित तो है. साथ ही उसके विदेश मंत्रालय का ये भी कहना है कि वह उम्मीद करता है कि ख़ान की परमाणु प्रसार की पुरानी गतिविधियाँ और इसका तंत्र पूरी तरह ख़त्म हो चुके होंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है, "पाकिस्तान ने परमाणु अप्रसार के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर सभी कदम उठा लिए हैं और एक्यू ख़ान का मामला हमारे लिए बंद अध्याय है."

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि अदालत ने उन्हें रिहा किया है और सरकार अदालत में फ़ैसलों में दख़ल नहीं देती.

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