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तमिल विद्रोहियों से दानदाताओं की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका को आर्थिक मदद देने वाले अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने तमिल विद्रोहियों से अनुरोध किया है कि वे हथियार डाल दें और संघर्ष समाप्त कर दें ताकि आम नागरिकों को निशाना बनने से बचाया जा सके. अमरीका, यूरोपीय संघ और नोर्वे ने कहा कि इसमें अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा जब विद्रोही सभी इलाक़ों पर अपना नियंत्रण खो देंगे. उनका कहना है कि दोनों पक्षों को ये महसूस करना चाहिए कि और जाने जाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है. श्रीलंका सरकार का कहना है कि विद्रोही हार के क़रीब है, हालांकि विद्रोहियों की ओर से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है. ऐसा माना जा रहा है कि संघर्ष में लगभग ढाई लाख आम नागरिक फंसे हुए हैं. श्रीलंका की सेना का कहना है कि उसे एक भूमिगत बंगर मिला है और ये तमिल विद्रोहियों के शीर्ष नेताओं के छुपने का स्थान हो सकता है. हवाई पट्टी पर कब्ज़ा इसके पहले श्रीलंका की सेना ने दावा किया था कि उसने तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाली आख़िरी हवाई पट्टी को भी अपने क़ब्ज़े में कर लिया है.
श्रीलंकाई सेना के अधिकारियों का कहना है कि हवाई पट्टी पर उन्हें कोई हवाई जहाज़ नहीं मिला है. तमिल विद्रोहियों के पास कई हवाई जहाज़ हैं जिसका इस्तेमाल वे श्रीलंकाई सेना पर हमले के लिए करते रहे हैं. श्रीलंका में इन दिनों सेना और स्वायत्तता की मांग कर रहे तमिल विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ा हुआ है. ताज़ा सशस्त्र अभियान में तमिल विद्रोहियों को काफ़ी नुकसान भी हुआ है. सैकड़ों हताहत कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना और एलटीटीई के बीच संघर्ष में पिछले कुछ दिनों के दौरान सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और लाखों अन्य संघर्ष वाले इलाक़े में फँसे हुए हैं. सहायता एजेंसियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फँसे लोग बुरे हाल में हैं और सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी है. श्रीलंका सेना का कहना है कि उसने 32 वर्ग किलोमीटर में बफ़र ज़ोन बनाया है ताकि नागरिक वहाँ आ सकें. लेकिन संवाददाताओं के मुताबिक यह 'सुरक्षित इलाक़ा' उस इलाक़े में है जहाँ विद्रोहियों का नियंत्रण है. लगभग ढाई दशक से तमिल विद्रोही अलग राष्ट्र की मांग को लेकर सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं, इसमें दोनों पक्षों के कम से कम 70 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. |
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