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'नागरिक युद्धक्षेत्र से निकल जाएँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने आम नागरिकों से कहा है कि वो उस इलाक़े से निकल जाएँ जहाँ तमिल विद्रोहियों से संघर्ष चल रहा है. सरकार के मुताबिक वो इन नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी नहीं ले सकती. एक बयान में कहा गया है, "उत्तर-पूर्व में संघर्ष निर्णायक स्थिति में है. एलटीटीए आतंकवादियों के बीच रह रहे नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार नहीं ले सकती." लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वहाँ फँसे हज़ारों लोग कैसे इलाक़े से निकल पाएँगे. विद्रोही इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वो लोगों को जाने से रोक रहे हैं. श्रीलंका सेना का कहना है कि उसने 32 वर्ग किलोमीटर में बफ़र ज़ोन बनाया है ताकि नागरिक वहाँ आ सकें. लेकिन संवाददाताओं के मुताबिक ये सेफ़ ज़ोन उस इलाक़े में है जहाँ विदोहियों का नियंत्रण है. इस बीच रेड क्रॉस का कहना है कि विद्रोहियों के नियंत्रण वाले पूर्वोत्तर श्रीलंका में एक अस्पताल गोलीबारी का निशाना बना है और हमले में नौ लोग मारे गए हैं. राहत एजेंसियों के अधिकारियों के मुताबिक मुलईतिवु ज़िले के गाँव के इस अस्पताल पर तीन बार हमला हुआ. अस्पताल पर हमला संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि गोले बच्चों के एक वॉर्ड में आकर गिरे. ये स्पष्ट नहीं है कि गोले किसने दागे.श्रीलंका की सेना ने इससे इनकार किया है कि हमले उसने किए जबकि तमिल विद्रोहियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. जिस गाँव के अस्तपताल पर हमला हुआ वहाँ हज़ारों की संख्या में आम नागरिक हैं. रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति की प्रवक्ता सोफ़ी रोमानेंस ने बताया कि अस्पताल परिसर में दागे गए गोले के कारण नौ लोग मारे गए और 20 अन्य घायल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि परिसर के बाहर भी कई लोग मारे गए हैं. अस्पताल के रसोईघर, चैपल और महिला तथा शिशु वार्ड में भी गोले आकर गिरे. संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने बताया कि पहला गोला स्थानीय समयानुसार करीब आधी रात को गिरा. ये अस्पताल इलाक़े के उन चंद अस्पतालों में से है जहाँ अब भी काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि वार्ड में काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों से उन्हें आखिरी संदेश ये मिला था- "महिला और शिशु वार्ड पर गोले दागे गए..मृतकों के शवों की गिनती कर रहे हैं." प्रवक्ता ने बताया कि अस्पताल घायलों से भरा हुआ है और मरीज़ों ने ज़मीन पर लेटाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा ये हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन है. रेड क्रॉस ने इन हमलों का विरोध किया है. रेड क्रॉस अधिकारी पॉल केस्टेला ने कहा, "हमें विश्वास नहीं हो रहा कि अस्पताल पर हमला किया गया. पिछले कुछ हफ़्तों में दूसरी बार ऐसा हुआ है." इससे पहले रविवार को श्रीलंकाई सेना ने कहा था कि वो नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दी गई समयसीमा समाप्त होते ही कार्रवाई शुरु कर देगी. जबकि श्रीलंका सरकार ने चेतावनी दी है कि 'विद्रोहियों से सहानुभूति जताने वाले' कूटनयिकों, सहायता एजेंसियों और पत्रकारों को निष्कासित किया जाएगा. सहायता एजेंसियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फँसे लोग बुरे हाल में हैं और सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नागरिकों को छुड़ाएगी श्रीलंका सरकार'01 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'युद्धक्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित'31 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस चेन्नई में श्रीलंकाई तमिलों के लिए प्रदर्शन30 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'घायलों को युद्ध क्षेत्र से निकालना शुरु'29 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस भारत का नागरिकों की सुरक्षा पर अनुरोध28 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें: मून27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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