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नवीन चावला पद छोड़ने को तैयार नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव आयोग में राजनीतिक रस्साकशी के बीच निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला ने अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी सरकार से सिफ़ारिश की है कि चावला को पद से हटा दिया जाए क्योंकि वे 'निष्पक्ष नहीं' हैं. चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने कहा कि उनके पद छोड़ने का सवाल ही नहीं है और वे अगले आम चुनाव कराने की तैयारियों में व्यस्त हैं. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफ़ारिश के बाद वे पद से हटेंगे तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मैं क्यों पद छोडूँगा?" चावला ने मुख्य चुनाव आयुक्त गोपालस्वामी की सिफ़ारिश पर टिप्प्णी करने से इनकार कर दिया, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने राष्ट्रपति को क्या सिफ़ारिश भेजी है. जब उनसे उनके अगले क़दम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हमारा अगला क़दम आम चुनाव है, भारतीय चुनाव आयोग की बेदाग छवि है और हम हमेशा की तरह अच्छी तरह चुनाव करना चाहते हैं. निर्वाचन आयोग की गरिमा सबसे ऊपर है." राजनीति तेज़ चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाए जाने की मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी की सिफ़ारिश को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज़ हो गई है. देश में लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने की संभावना है इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफ़ारिश की वजह से राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है. कांग्रेस ने कहा है कि इस फ़ैसले से कई "बारीक़ क़ानूनी पहलू जुड़े हुए हैं" जिसमें यह बात भी शामिल है कि "क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के पास अपने सहकर्मी को हटाने का अधिकार है." कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, "हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, न ही हमें इसकी जानकारी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी सिफ़ारिश में क्या लिखा है." उन्होंने कहा, "जैसा कि मीडिया रिपोर्टों से पता चला है, गेंद केंद्र सरकार के पाले में है, कानूनी पहलुओं की पूरी पड़ताल किए बिना कोई टिप्पणी करना जल्दबाज़ी होगी." कांग्रेस के एक अन्य नेता शकील अहमद ने कहा कि इस तरह का विवाद "देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थानों की छवि" के लिए नुक़सानदेह है, उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. अहमद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) काफ़ी समय से इस मामले को तूल दे रही है और चुनाव के समय इस संवेदनशील मुद्दे को दोबारा उठाया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी 20 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं, वरिष्ठता के आधार पर नवीन चावला उनकी जगह मुख्य चुनाव आयुक्त बन सकते थे, ऐसी स्थिति में अगले आम चुनाव उन्हीं की निगरानी में होते. भाजपा ने एक साल पहले चावला के 'निष्पक्ष न होने' की शिकायत मुख्य चुनाव आयुक्त से की थी, भाजपा का आरोप है कि चावला के कांग्रेस पार्टी से नज़दीकी और पुराने संबंध हैं. भाजपा का रुख़ इस मामले पर विपक्षी पार्टी भाजपा ने "ठोस कार्रवाई" की माँग की है और कहा है कि "चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दाँव पर लगी है". भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "इस मामले पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारत के लोकतांत्रिक चरित्र के लिए ही ख़तरा पैदा हो जाएगा. जब चुनाव आयोग पर ही विश्वास नहीं रह जाएगा तो लोकतंत्र और संविधान का पालन कैसे होगा." लेकिन भाजपा के महासचिव अरुण जेटली ने कहा है कि यह सवाल अप्रासंगिक है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने सहयोगी आयुक्त को हटाने की सिफ़ारिश करने का अधिकार है या नहीं. उनका कहना है कि संविधान में इसका प्रावधान है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी व्याख्या में भी इसकी पुष्टि की है कि मुख्य चुनाव आयोग को इसका अधिकार है. एन गोपालस्वामी और नवीन चावला के बीच जारी इस खींचतान को कई राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही रस्साकशी के रूप में देख रहे हैं. वामपंथी पार्टी सीपीआई ने कहा है कि गोपालस्वामी की सिफ़ारिश से किसी'राजनीतिक मक़सद' का संदेह पैदा हो रहा है इसलिए संसद को चाहिए कि वह चुनाव आयोग के कामकाज और अधिकारों की समीक्षा करे. सीपीआई के वरिष्ठ नेता डी राजा ने कहा, "इस तरह की सिफ़ारिश के समय को देखते हुए इससे राजनीतिक मक़सद की बू आती है इसलिए सही यही होगा संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, निष्कासन आदि के तौर-तरीक़ों पर पुनर्विचार करे." आगे की प्रक्रिया मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी सिफ़ारिश अब राष्ट्रपति को भेज दी है, इस मामले पर केंद्र सरकार का जो भी फ़ैसला होगा उस पर राष्ट्रपति की मुहर लग जाएगी. संवैधानिक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ सुभाष काश्यप ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी निर्वाचन आयुक्त को सिर्फ़ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही हटाया जा सकता है. अब सिफ़ारिश राष्ट्रपति के पास भेज दी गई है, इस पर मंत्रिमंडल निर्णय करके राष्ट्रपति को सूचित करेगा." उन्होंने कहा कि "राष्ट्रपति आम तौर पर मंत्रिमंडल के निर्णय को मानते हुए उस पर मुहर लगा देते हैं लेकिन वे अगर चाहें तो सरकार से पुनर्विचार करने को कह सकते हैं". सुभाष काश्यप ने स्पष्ट किया कि मुख्च चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी के रिटायर होने के बाद ज़रूरी नहीं है कि सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त (इस मामले में नवीन चावला) को ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया जाए, सरकार चाहे तो इस पद पर किसी भी योग्य व्यक्ति की नियुक्ति कर सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें चुनाव आयुक्त चावला को हटाने की माँग30 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस चावला को क्लीनचिट से भाजपा नाराज़08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'चुनाव आयुक्तों पर जातिवाद का आरोप'08 मई, 2005 | भारत और पड़ोस चुनाव आयुक्तों पर आरोप, इस्तीफ़े की मांग07 मई, 2005 | भारत और पड़ोस अपने काम का लोहा मनवाया लिंगदोह ने07 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस "चुनाव आयोग इस समय लावारिस है"18 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस राजनीतिज्ञ 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