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नेपाल: माओवादियों और सेना में मतभेद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में पिछले साल सत्ता में आए माओवादियों और सेना के बीच चल रहा वाकयुद्ध तेज़ हो गया है. नेपाल के रक्षामंत्री राम बहादुर थापा ने एक आदेश जारी कर सेना प्रमुख से सेना के लिए जारी भर्ती प्रक्रिया को रोकने को कहा है. सत्तारूढ़ माओवादी और नेपाली सेना 2006 से पहले क़रीब 10 साल तक आपस में लड़ते रहे हैं. नेपाल में पिछले साल अप्रैल में हुए आम चुनाव में माओवादियों ने भारी जीत दर्ज की थी. इसके बाद से ही सेना और माओवादियों के बीच टकराव चल रहा है. बिगड़ते संबंध माओवादी सेना के आयुक्त और अब रक्षामंत्री राम बहादुर थापा और सेना प्रमुख जनरल रुकमांगद कटवाल के बीच संबंध अब सामान्य नहीं रह गए हैं. जनरल रुकमांगद की नियुक्ति उस समय हुई थी जब नेपाल में राजा का शासन था. रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष पहले आपस में नियमित रूप से मिलते रहते थे. लेकिन पिछले दिनों सेना प्रमुख ने कहा था कि सेना के पास यह अधिकार है कि वह सेवानिवृत्ति से रिक्त हुए पदों पर आम लोगों की भर्ती करे. वहीं माओवादियों का कहना है कि आपसी सहमति के बिना सशस्त्र बलों में भर्ती करना दोनों पक्षों के बीच हुए शांति समझौते का उल्लंघन होगा. चेतावनी राम बहादुर थापा ने एक संसदीय समिति से कहा है कि अगर सेना में जारी भर्ती को निलंबित नहीं किया गया तो इसके 'गंभीर परिणाम' होंगे. उन्होंने कहा कि सेना को उनके निर्देशों का पालन ज़रूर करना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश में हालात सैनिक शासन जैसे हो जाएँगे. नेपाल में 19 हज़ार माओवादी इन दिनों शिविरों में रह रहे है और वे सेना में शामिल होना चाहते हैं. लेकिन जनरल कुटवाल कहते है, " मैं यह कभी स्वीकार नहीं करूंगा कि किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोग सेना में शामिल हों." वहीं पीपुल्स लिबरेशन आर्मी या पीएलए के नाम से मशहूर माओवादी सेना चाहती है कि उसके कुछ कमांडर सेना के उच्च पदों पर नियुक्त हों और पीएलए का अलग स्वरूप भी बना रहे. वहीं पीएलए के का एक धड़ा किसी भी तरह के विलय के ख़िलाफ़ है. उसका मानना है कि पीएलए मूल रूप में ही बनी रहे. |
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