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'भारत के प्रधानमंत्री के बयान से निराशा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री के बयान से उन्हें निराशा हुई है. बुधवार को शाह महमूद क़ुरैशी ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में कहा कि मनमोहन सिंह जैसे परिपक्व और अनुभवी नेता की ओर से जो बयान दिया गया है उससे उन्हें निराशा हुई है. मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि मुंबई में 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों को जिस तरह से अंजाम दिया गया था उसमें पाकिस्तान की किसी सरकारी एजेंसी की मदद के संकेत मिलते हैं. अनुभवी व्यक्ति का बयान उनका कहना था, "मनमोहन सिंह जैसे विचारक, दूरदर्शी और अनुभवी व्यक्ति की तरफ़ से जो बयान आया है वो बहुत निराशाजनक है. " उनका ये भी कहना था कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता, जबकि भारत युद्ध के लिए आतुर है. उनका कहना था, "पाकिस्तान सदभाव, क्षेत्र की स्थिरता, समृद्धि और शांति चाहता है, और अगर भारत हमला करता है तो पाकिस्तान उसका जवाब देगा." पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आरोप को ख़ारिज करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण क़रार दिया था. ग़ौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को मुख्यमंत्रियों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मुंबई हमलों के बारे में अब यह साफ़ हो चुका है कि इनके पीछे पाकिस्तानी चरमपंथी संगठन, लश्करे तैबा का हाथ है. उन्होंने कहा कि हमलों के बाद भारतीय और विदेशी एजेंसियों ने जो सबूत जुटाए हैं उनके आधार पर ही ये कहा जा रहा है. नवंबर 2007 में मुंबई पर हुए चरमपंथी हमले के लिए भारत पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है और इस वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है. 26 नवंबर को मुंबई के विभिन्न स्थानों पर हुए हमलों में देशी और विदेशियों नागरिकों समेत 177 लोग मारे गए थे और बड़ी तादाद में लोग ज़ख़्मी भी हुए थे. |
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