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'हमलों में पाक एजेंसी की भूमिका' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि मुंबई में 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों को जिस तरह से अंजाम दिया गया था उसमें पाकिस्तान की किसी सरकारी एजेंसी की मदद, सहयोग के संकेत मिलते हैं. आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा और ख़ुफ़िया तंत्र से जुड़े कई मुद्दों पर मंगलवार को दिल्ली में मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक हो रही है. मुख्यमंत्रियों की इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मुंबई हमलों के बारे में अब यह साफ़ हो चुका है कि इनके पीछे पाकिस्तानी चरमपंथी संगठन, लश्करे तैयबा का हाथ है. उन्होंने कहा कि हमलों के बाद विदेशी एजेंसियों और भारतीय एजेंसियों द्वारा जो साक्ष्य जुटाए गए हैं, उनके आधार पर ही ये कहा जा रहा है. उन्होंने कहा, "नक्सली चरमपंथ की समस्या हमारी अपनी ज़मीन पर पैदा हुई है पर भारत में जो आतंकवादी घटनाएं हैं, उनको बाहर के देशों से ख़ासतौर पर पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा है. पाकिस्तान ने चरमपंथ को सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल किया है." अहम बैठक मुख्यमंत्रियों की इस बैठक में चरमपंथ से लड़ने की रणनीति, ख़ुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की व्यवस्था को मज़बूत करने, सीमा और तटीय सीमाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत हो रही है.
इसके अलावा उन विशेष इमारतों, भवनों, उपक्रमों की सुरक्षा पर भी विशेष रूप से चर्चा होनी है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं. इनमें परमाणु संयंत्रों को भी शामिल करके देखा जा रहा है. यह पहला मौका है जब गृहमंत्री का नया पदभार संभालने के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम सुरक्षा के मुद्दे पर इस स्तर की कोई बैठक कर रहे हैं. बैठक की शुरुआत में बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा कि सबसे ज़्यादा इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि सूचनाओं के आदान प्रदान, ख़ुफ़िया जानकारी के विश्लेषण और सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से प्रयास हों. गृहमंत्री बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चरमपंथ और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं और उनके विचार, सुझाव भी ले रहे हैं. अहम मुद्दे ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने गंभीर रुख अख़्तियार किया है.
मुंबई हमलों के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफ़िया तंत्र के कामकाज के तरीके पर भी बहुत सवाल उठाए गए थे. इसके चलते ही हमलों के बाद नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. ऐसे में वर्तमान गृहमंत्री सुरक्षा और चरमपंथ से लड़ने की तैयारियों को ज़्यादा गंभीरता से देख भी रहे हैं. मंगलवार की बैठक के दौरान पुलिस विभागों में रिक्त पदों को तत्काल भरने, सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को चुस्त करने और सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों में कमांडो यूनिटों को खड़ा करने के मुद्दों पर फ़ैसले लिए जा सकते हैं. पर सबसे अहम चर्चा होनी है हाल ही में भारतीय संसद में पारित एक राष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसी बनाने के प्रस्ताव पर. गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से तालमेल और इसे लागू करने के तरीके पर चर्चा कर सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में सुरक्षा मामलों पर शीर्ष बैठक20 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सुरक्षा विधेयक पर संसद में बहस17 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पारित17 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस यूएपीए: आतंक से लड़ने का सही जवाब?24 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'आतंकवाद रोकने के लिए क़ानून बने'24 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस पोटा जैसा क़ानून नहीं, कई नए उपाय18 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस आतंकवाद: नए क़ानून की सिफ़ारिश16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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