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सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय जांच एजेंसी विधेयक और ग़ैर क़ानूनी गतिविधि निरोधक कानून संशोधन विधेयक लोकसभा में लंबी बहस के बाद बुधवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिए गए. विधेयकों पर हुई बहस का जवाब देते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि बेशक क़ानून को सख़्त बनाया गया है, पर इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है की किसी भी तरह से इस क़ानून का दुरूपयोग ना हो. उन्होंने सांसदों की इस चिंता को भी दूर करने की कोशीश की के राष्ट्रीय जांच एजेंसी के गठन से राज्य सरकारों के अधिकारों मे कटौती हो सकती है. चिदंबरम ने इस विधेयक के दुरूपयोग को रोकने के लिए किये गए प्रावधानों का ज़िक्र करते हुए कहा, ये बात सही है कि इस क़ानून के तहत सरकार जांच शुरू कर सकती है, और मामला चलाने की अनुमति दे सकती है, लेकिन सरकार को अनुमति देने से पहले, एक स्वतंत्र संस्था को ये विश्वास दिलाना होगा की जिस मामले को चलाने की अनुमति दी जा रही है, वो मामला उचित है. न्यायिक संस्था स्वतंत्र संस्था का स्वरूप क्या होगा, इसके बारे मे उनका कहना था की इस बारे में उनके विचार मे जो स्वरुप है वो एक न्यायिक संस्था होगी. राज्य सरकारों के अधिकारों की बात करते हुए गृहमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस क़ानून को लागू करते हुए इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा की राज्य के अधिकारों की क्षति ना हो. उन्होंने कहा कि ये प्रावधान रखा गया है कि अगर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को ये लगता है कि राज्य पुलिस की जांच सही है और पुलिस इस जांच मे सक्षम है तो कोई मामला राज्य सरकार को जांच के लिए लौटाया जा सकता है. क़ानून मे तब्दीली के बाद अब अगर जांच एजेंसी को लगता है की उसको जांच के लिए अधिक समय चाहिए तो किसी अभियुक्त को 180 दिन यानि छह महीने तक पुलिस हिरासत में रखा जा सकता है. विशेष अदालतों का गठन इसके अलावा इस विशेष क़ानून के तहत चलने वाले मुक़दमो की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा, लेकिन इन अदालतों मे न्यायधीशों की नियुक्ति उच्च अदालतों के मुख्य न्यायधीशों के हाथ मे होगी. इस क़ानून पर हुई बहस मे हिस्सा लेते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया पर कहा कि सरकार ने इस क़ानून की आवश्यकता को समझने मे देर लगाई. वामपंथी पार्टियों ने इस विधेयक मे कई संशोधनों का प्रस्ताव रखा, और आशंका व्यक्त की कि सरकार जल्दबाज़ी मे ये क़ानून ला रही है. इन पार्टियों ने कहा कि सरकार को ये ध्यान रखना चाहिए की सख़्त क़ानूनों का दुरुपयोग निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ ना हो. हांलाकी गृहमंत्री पी चिदंबरम के इस आश्वासन के बाद कि लोकसभा मे प्रकट की गई चिंताओं को वो ध्यान मे रखेंगे और आवश्यकता पङने पर लोकसभा के अगले सत्र मे इन क़ानूनो मे सुधार किया जा सकता है, वामदलों ने अपने ज़्यादतर संशोधनों पर ज़ोर नही दिया. अब इन विधेयकों पर राज्य सभा मे शुक्रवार को बहस होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें संघीय जाँच एजेंसी को मंज़ूरी15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस संघीय जाँच एजेंसी पर संसद में बहस 16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नए क़ानून बनाने की योजना है: सोनिया16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'भाजपा को माफ़ी माँगनी चाहिए'17 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सुरक्षा विधेयक पर संसद में बहस17 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस रिपोर्ट की आलोचना से स्पीकर हुए नाराज़17 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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