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मुंबई हमलों के एक महीने बाद.. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों के ठीक एक महीने बाद वहाँ ज़िंदगी की रफ़्तार सामान्य होती नज़र आ रही है लेकिन लोग अभी भी सशंकित हैं. भारत ने इन हमलों के लिए पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों को ज़िम्मेदार ठहराया और जीवित पकड़े गए हमलावर मोहम्मद आमिर कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने के दावे किए जा रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार कर रहा है और इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है. 26 नवंबर को दस चरमपंथियों ने मुंबई के भीड़-भाड़ वाले इलाक़ों को निशाना बनाया था जिनमें 180 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और ढाई सौ से ज़्यादा घायल हुए. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ये दसों चरमपंथी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुँचे थे.
छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर सबसे पहले हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं जहाँ 58 लोग मारे गए. इसके बाद ताज और ऑबराय-ट्राइडेंट होटल के साथ-साथ नरीमन हाउस को निशाना बनाया जहाँ यहूदी परिवार रहते थे. 26 नवंबर को इन हमलावरों के ख़िलाफ़ शुरु हुई कमांडो कार्रवाई 29 नवंबर को ताज होटल को मुक्त कराने के साथ ख़त्म हुई थी. कार्रवाई में एक हमलावर मोहम्मद आमिर कसाब ज़िंदा पकड़ा गया जबकि नौ मारे गए थे. कड़ी सुरक्षा हमले के एक महीने पूरे होने पर सीएसटी स्टेशन पहुँचे बीबीसी संवाददाता सुझील झा ने बताया, स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा है. विशेष दस्ते तैनात किए गए हैं जिनके पास स्वचालित हथियार हैं.
हालाँकि माहौल पहले जैसा नहीं है. सभी यात्रियों के सामानों की तलाशी ली जा रही है. टर्मिनल के बाहर से देखने पर लगता है कि किसी छावनी की ओर जा रहे हैं. स्टेशन पर दुकानदार प्रमोद गुप्ता कहते हैं, "लोग आते तो हैं लेकिन बैठते नहीं. पहले ट्रेन आने से काफी पहले लोग आ जाते थे. अब बिक्री कम हो गई है." ताज और ऑबराय होटलों की ज़बर्दस्त सुरक्षा घेराबंदी की गई है. ताज होटल के कुछ इलाक़ों में आम लोगों का जाने की मनाही है जहाँ हमलों से पहले पर्यटक जा सकते थे. ताज के ठीक सामने गेटवे ऑफ़ इंडिया पर सैलानी आ तो रहे हैं लेकिन उनकी दिलचस्पी अब ज़्यादा हमलों के निशान देखने की है. नरीमन हाउस का जायज़ा लेने पहुँचे बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बताया कि वहाँ मारे गए यहूदियों की याद में गुरुवार को एक प्रार्थना सभा हुई और बाद में गेटवे ऑफ़ इंडिया तक मार्च भी निकाला गया. आठ दिन चलने वाले यहूदी त्योहार हानुका के मौके पर ताज होटल के सामने यहूदी इकठ्ठा हुए. इस मौके पर उन्होंने रोशनी की और चरमपंथ के सामने घुटने न टेकने की बात की. |
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