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'हमें ख़ुद चुनौतियों से निपटना होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि विकासशील देशों को आर्थिक संकट और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने का रास्ता ख़ुद निकालना चाहिए. उन्होंने नई दिल्ली में शुक्रवार को कहा, "आर्थिक संकट, आतंकवाद या जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर विकसित देशों की नीतियों से स्पष्ट है कि अच्छे विचारों पर सिर्फ़ उनका विशेषाधिकार नहीं है. विकासशील दुनिया विकसित देशों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं लेकिन हमें इन चुनौतियों से निपटने के लिए ख़ुद अलग रास्ते बनाने होंगे." वो नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के 75वें जन्मदिन पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे. प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की ज़रूरत, लोकहित और लोकतांत्रिक राजनीति का भी यही तकाजा है. उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि कैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर सिर्फ़ कुछ देशों का नियंत्रण है. मनमोहन सिंह का कहना था, "मुझे ये देख कर कई बार हैरानी होती है कि किस तरह कुछ देश अतंरराष्ट्रीय संस्थानों पर नियंत्रण बनाते हैं जबकि वो भूमंडलीकरण और लोकतंत्र की बात करते हैं." उनका कहना था कि अब समय आ गया है जब नेताओं को समय के साथ चलते हुए विश्व अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का सामना करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा, समस्या भले ही पूरी दुनिया की है लेकिन देश या क्षेत्र के आधार पर स्थानीय समाधान की ओर बढ़ना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें केरी-मनमोहन बैठक में मुंबई पर चर्चा 15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस संघीय जाँच एजेंसी को मंज़ूरी15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई हो'13 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मनमोहन सिंह ने की राष्ट्रपति से मुलाक़ात09 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस समाज में बढ़ती हिंसा से प्रधानमंत्री चिंतित06 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस संघीय जाँच एजेंसी गठित की जाएगी30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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