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पाँच राज्यों में सत्ता के फ़ैसले की घड़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पाँच राज्यों में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम सोमवार को सामने होंगे. लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र इन्हें अहम माना जा रहा है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली और मिज़ोरम विधानसभा चुनावों की मतगणना सुबह आठ बजे शुरु होगी. मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से होने के कारण पाँचों राज्यों में भावी सरकार की तस्वीर शाम तक स्पष्ट हो जाने की उम्मीद है. मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 229 सीटों के लिए मतगणना होगी. एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी की हत्या हो जाने के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं. मध्य प्रदेश में एक ही दिन 27 नवंबर को मतदान हुए थे. छत्तीसगढ़ की 90 सीटों के लिए दो चरणों में 14 नवंबर और 20 नवंबर को वोट डाले गए थे. दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों और मिज़ोरम की 40 सीटों के लिए 29 नवंबर को मतदान हुए. राजस्थान में चार दिसंबर को एक ही चरण में मतदान हुए. यहाँ विधानसभा की 200 सीटें हैं. दोतरफ़ा मुक़ाबला मिज़ोरम को छोड़ कर बाकी चारों राज्यों में मुख्य मुक़ाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा की सरकार है जबकि दिल्ली की सत्ता कांग्रेस के हाथों में है.
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज पाटिल ने विकास को मुख्य मुद्दा बनाया था. पिछले चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत हासिल हुआ था और उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं थीं लेकिन इस चुनाव में तस्वीर अलग है. उमा भारती की पार्टी भारतीय जनशक्ति पार्टी ने भाजपा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला और लगभग सभी सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए. मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इन चुनावों में पूरी ताकत झोंकना कांग्रेस और भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गया है. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह की परीक्षा होगी. यहाँ कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने जम कर प्रचार किया. राजस्थान विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में सत्तारुढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच काँटे का मुक़ाबला है. यहाँ 68 फ़ीसदी मतदान हुआ था.
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बाग़ियों की ओर से खड़ी हो सकती है क्योंकि उन्होंने कई विधायकों के टिकट काट दिए थे और वो सरकार के ख़िलाफ़ प्रचार करते नज़र आए. अशोक गहलोत की अगुआई में कांग्रेस पार्टी ने गूजर आंदोलन को संभालने में सरकार की विफलता, किसानों पर फ़ायरिंग जैसे मुद्दों को चुनाव में उठाया. दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रही हैं. जानकारों की राय में अगर कांग्रेस फिर से सत्ता में लौटती है तो उनका मुख्यमंत्री बनना तय है. मिज़ोरम में मुक़ाबला सत्तारुढ़ मिज़ो नेशनल फ़्रंट, कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रैटिक अलायंस के बीच है. भाजपा ने इन चुनावों को जहां अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल बताया है, वहीं कांग्रेस इससे सहमत नहीं है. |
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