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'विकास के बूते फिर सरकार बनाएंगे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेरा दावा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार सिर्फ़ पिछले पाँच पर्षो की उपलब्धियों के आधार पर ही लौट जाएगी और कांग्रेस का सपना आठ दिसंबर को मतगणना के दिन चकनाचूर हो जाएगा. हम मुख्य तौर पर चार मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में डटे हैं, विकास, केंद्र सरकार का पक्षपात, महँगाई और आतंकवाद. चुनाव प्रचार ख़त्म हो चुका है और राज्य के कोने-कोने में हमारे पक्ष में जनता का अपार समर्थन मिला है. मेरी पार्टी को स्पष्ट बहुमत पाने का पूरा विश्वास है. जहाँ तक भाजपा से अलग हुई उमा भारती की पार्टी का सवाल है तो उनका कोई ख़ास असर नहीं पड़ने वाला. इसके बावजूद मैं कह दूं कि जब हम पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल की बात करते हैं तो उसमें उमा भारती और बाबूलाल गौर का कार्यकाल भी शामिल है. रही बात उनके भाजपा के ख़िलाफ लड़ने की तो मैं बता दूँ कि मध्य प्रदेश में हमेशा मुक़ाबला दो दलों के बीच ही रहा है. हाँ कुछ जगहों पर त्रिकोणीय संघर्ष है. 'भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं' सुरेश पचौरी जो ये कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है तो मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान उनकी पार्टी ने इसके ख़िलाफ़ क्या कोई आंदोलन खड़ा किया, कोई सबूत दे पाई?
सिर्फ़ चुनाव के समय भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार रटने से क्या होता है. अगर ये पार्टी वाकई जनता के प्रति जवाबदेह है तो पिछले पाँच वर्षों में विधानसभा में हमारी सरकार के ख़िलाफ़ कोई अविश्वास प्रस्ताव क्यों नहीं आया? जनता सब पहचानती है और कांग्रेस को इस दुष्प्रचार का परिणाम भुगतना पड़ेगा. हमारी सरकार ने हजारों किलोमीटर लंबी सड़कें बनवाई, कई बिजली परियोजनाएँ शुरु, इसे कोई भी नकार नहीं सकता. हाँ हर घर में बिजली न पहुँची हो, इसे मैं स्वीकार कर सकता हूँ लेकिन विकास की रफ़्तार कतई धीमी नहीं पड़ी है. 'आतंकवाद है बड़ा मुद्दा'
भले ही यह विधानसभा चुनाव है लेकिन पूरे देश में आतंकवाद के प्रति केंद्र सरकार के नरम रवैये से जनता क्षुब्ध है. हम पर सांप्रदायिकता का आरोप लगता है तो लगे. हम हिंदुत्व के एजेंडे पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन संतों और हिंदू धार्मिक स्थानों का अपमान नहीं सह सकते और आज आतंकवाद पर बहस में ये चीचें शामिल हैं. जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह सकते हैं कि हनीफ़ की ऑस्ट्रेलिया में गिरफ़्तारी की ख़बर सुनने के बाद उन्हें रात भर नींद नहीं आई, तो प्रज्ञा सिंह ठाकुर के लिए अगर हमारी पार्टी कुछ कहती है तो परहेज़ क्यों. मैं कांग्रेस को चेतावनी देता हूँ कि वो एटीएस को राजनीतिक हथियार नहीं बनाए. आख़िर प्रज्ञा सिंह ठाकुर किसी अदालत में दोषी नहीं पाई गई हैं, उन पर सिर्फ़ आरोप लगे हैं. कांग्रेस ने जिस तरह से मालेगाँव धमाके के सूत्र मध्य प्रदेश में निकालने की कोशिश की है, उसके बुरे परिणाम उसे भुगतने पड़ेंगे. (बीबीसी संवाददाता आलोक कुमार से बातचीत के आधार पर) |
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