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भाजपा का नारा 'कांग्रेस में टिकट बिकते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभी मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी चुनावी प्रचार अभियान की तैयारी में ही थी कि पार्टी नेताओं को सुबह-सुबह राज्यभर के अख़बारों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शक्ल के अलावा कांग्रेस की पूर्व महासचिव मार्गरेट अल्वा के मुस्कुराते चेहरे के भी दर्शन हुए. अख़बारों में जारी विज्ञापन में मार्गरेट अल्वा का कांग्रेस में टिकटों की ख़रीद-फ़रोख़्त का बयान छपा है. भाजपा ने वोटरों को संदेश दिया है कि जो पार्टी चुनावी टिकट बेच सकती है उसे प्रदेश की सत्ता सौंपे जाने पर वह न जाने क्या क्या बेच देगी. उधर कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी की पूर्व महासचिव मार्गरेट अल्वा के आरोपों का खंडन किया है. कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा है, "ये आरोप निराधार हैं. कांग्रेस में कभी भी टिकट बिके नहीं हैं. उम्मीदवारों का चयन उनके गुण-दोष का आकलन करने के बाद ही किया जाता है." 'कांग्रेस कल्चर' पर हमला राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार से अपना चुनावी प्रचार अभियान शुरू किया है और वह 'कांग्रेस कल्चर' पर ज़बरदस्त प्रहार की मुद्रा में है. और वह बार-बार कांग्रेस के ज़रिए संसद में हाल के विश्वास मत जीतने, नरसिंह राव-झारखण्ड मुक्ति मोर्चा रिश्वत मामले से लेकर इंदिरा गाँधी के चुनाव के दौरान सरकारी साधनों का दुरुपयोग किए जाने तक की बात कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी जिन्हें भाजपा लगातार 'रोम' से जोड़कर पेश करती है, उसे मार्गरेट अल्वा जो ख़ुद ईसाई समुदाय से हैं, 'हिम्मतवाली' महिला लगती हैं. भाजपा के ज़रिए नकारात्मक इश्तहार आने के बाद राज्य कांग्रेस इकाई के ज़्यादातर नेता और प्रवक्ताओं की हाल में तैयार की गई फौज "दिल्ली में चल रहे इस मामले" पर कुछ कहने के लिए तैयार नहीं. प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने बीबीसी से कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और भाजपा को पहले अपनी पार्टी में इस तरह के उठे सवालों पर जवाब देना चाहिए. उनका कहना था, " इस मामले का मध्य प्रदेश की राजनीति या चुनाव पर कोई असर नहीं होगा." कई नेता निशाने पर कांग्रेस पर पैनी नज़र रखने वाले रशीद क़िदवई कहते हैं, " भाजपा ने इस मुद्दे को उठा कर जहाँ कांग्रेस पर सवालिया निशान लगाए हैं वहीं उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी निशाने पर लेने की कोशिश की है." रशीद क़िदवई कहते हैं, "मार्गरेट अल्वा के मामले में अन्य लोगों के साथ दिग्विजय सिंह का नाम भी उछला है क्योंकि वो कर्नाटक में टिकट वितरण के अलावा मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों के लिए हुई इस प्रक्रिया में किसी न किसी रूप में शामिल थे." कर्नाटक चुनाव के लगभग छह महीने बाद मार्गरेट अल्वा के टिकट के ख़रीद-फरोख़्त के मामले को उठाने को सोनिया गाँधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और राहुल गाँधी को राजनीति के गुर सिखा रहे दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के अन्य राजनेताओं के बीच शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है. |
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