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शनिवार, 06 दिसंबर, 2008 को 11:31 GMT तक के समाचार
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फ़ोन की वजह से छिड़ सकती थी लड़ाई
बिना जाँच किए राष्ट्रपति ज़रदारी को फ़ोन दे दिया गया था
मुंबई के हमलों के बाद 28 नवंबर की शाम को पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के दफ़्तर में आए एक फ़ोन से इस्लामाबाद में भारी हड़कंप मच गया.

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचारपत्र 'डॉन' के मुताबिक़ ख़ुद को भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी बताने वाले व्यक्ति ने आसिफ़ अली ज़रदारी से कहा कि अगर पाकिस्तान ने हमले के दोषी लोगों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई नहीं की तो भारत सैन्य शक्ति का प्रयोग करने जा रहा है.

इसके बाद पाकिस्तान के सैनिक प्रशासन में खलबली मच गई और पाकिस्तानी सेना किसी संभावित हमले से निबटने की तैयारी में जुट गई, सेना ने 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया.

जैसे ही फ़ोन पर बातचीत ख़त्म हुई पाकिस्तान में कूटनीतिक और सैनिक अधिकारियों की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया, प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को विशेष विमान से लाहौर से इस्लामाबाद बुलाया गया.

दिलचस्प बात ये है कि उस समय पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भारत में ही मौजूद थे, उन्हें 29 नवंबर की शाम को लौटना था लेकिन एक विशेष विमान भेजकर उन्हें सुबह ही बुला लिया गया.

इस्लमाबाद में तनाव बढ़ने लगा और एक वरिष्ठ सैनिक अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान अपने सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से हटाकर भारतीय सीमा की तरफ़ ले जा सकता है.

रविवार की सुबह रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लोगों आसमान में शोर मचाते लड़ाकू विमानों को नोटिस किया क्योंकि पाकिस्तानी वायु सेना भी 'हाई अलर्ट' पर थी.

पाकिस्तान के अधिकारियों ने फ़ोन करने वाले व्यक्ति की पक्की शिनाख़्त न करके हड़बड़ी में बड़ी भूल कर दी थी जिसका उन्हें एहसास था, बाद में यह भी पता चला कि ऐसा ही एक फ़ोन अमरीकी विदेश मंत्री के दफ़्तर में गया था लेकिन अमरीकियों ने कॉन्डोलिज़ा राइस से बात कराने के बदले पहले पक्की जाँच की और उन्हें पता चल गया कि भारतीय विदेश मंत्री नहीं बल्कि कोई बहुरुपिया बोल रहा है.

डॉन के मुताबिक़, इसके बाद कॉन्डोलिज़ा राइस ने प्रणव मुखर्जी से सीधे बात की जिसमें भारतीय विदेश मंत्री ने बताया कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति से कोई बात ही नहीं हुई है.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान से आधिकारिक स्तर पर सिर्फ़ एक ही बार बातचीत हुई, और वह बातचीत दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ हुई थी जो बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई, इस बात की पुष्टि कुरैशी ने पाकिस्तान लौटकर एक संवाददाता सम्मेलन में की.

अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि फ़ोन कहाँ से किया गया था, कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि फ़ोन नंबर दिल्ली का था लेकिन भारत ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

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