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शुक्रवार, 21 नवंबर, 2008 को 14:48 GMT तक के समाचार
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आडवाणी के केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार
आडवाणी
आडवाणी ने कहा इस समय भारत की बागडोर कमज़ोर सरकार के हाथ में नहीं होनी चाहिए
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लाल कृष्ण आडवाणी ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा है कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनती है तो आर्थिक संकट और अन्य समस्याओं पर उसकी रणनीति वर्तमान नीतियों से पूरी तरह अलग होगी.

सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को आड़े हाथों लेते हुए हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के वार्षिक सम्मेलन में आडवाणी ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में कोई भी कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए.

उनका कहना था, "ऐसे समय जब आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा को पैदा हुए ख़तरे हमारे सामने हैं, तब भारत की बागडोर एक कमज़ोर सरकार और असफल नेतृत्व के हाथ में नहीं होनी चाहिए. भारत की सरकार इस तरह नहीं चलनी चाहिए."

विपक्ष के नेता आडवाणी ने कहा, "लोकतांत्रिक प्रणाली में कांग्रेस का कोई भी अध्यक्ष प्रधानमंत्री से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता. इस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री के पद का सबसे अधिक अवमूल्यन हुआ है."

 ऐसे समय जब आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा को पैदा हुए ख़तरे हमारे सामने हैं, तब भारत की बागडोर एक कमज़ोर सरकार और असफल नेतृत्व के हाथ में नहीं होनी चाहिए. लोकतांत्रिक प्रणाली में कांग्रेस का कोई भी अध्यक्ष प्रधानमंत्री से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता. इस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री के पद का सबसे अधिक अवमूल्यन हुआ है
लालकृष्ण आडवाणी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में उनकी समय-समय पर टिप्पणी और आलोचना पर भी उन्होंने विचार व्यक्त किए.

आडवाणी का कहना था, "कुछ जगह पर निकम्मा शब्द का इस्तेमाल हुआ है. मुझे ये शब्द पसंद नहीं लेकिन आंग्रेज़ी के शब्दों के अनुवाद में कई बार लोग ऐसा कर देते हैं. लोकतांत्रिक प्रणाली में प्रधानमंत्री का कहा ही आख़िरी शब्द होना चाहिए."

'विदेशी ताकत के सहायक नहीं'

एनडीए का एजेंडा प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा, "भारत को किसी भी विदेशी ताक़त का हिस्सा या सहायक बनकर नहीं चलना चाहिए. हमें अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करना चाहिए.

उनका कहना था, "यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनती है तो समस्याएँ सुलझाने के बारे में हमारी रणनीति बिलकुल अलग होगी. लोगों में विश्वास पैदा करने के प्रयास होंगे लेकिन भारत के विकास के बारे में हमारा लक्ष्य ऊँचा होगा. हम संसाधन बाँटने में समानता और संतुलित विकास को प्राथमिकता देंगे ताकि ग़रीबी और बेरोज़गारी को दूर किया जा सके."

 हाल में मैंने कहा था कि हिंदू आतंकवाद या मुस्लिम आतंकवाद की संज्ञा ग़लत है...यदि कोई आतंकवादी है तो वह चाहे किसी भी धर्म का हो, उसे सज़ा होनी चाहिए
लालकृष्ण आडवाणी

आडवाणी ने कहा कि वे जानते हैं कि यदि एनडीए असफल रहता है तो ये ग्रामीण भारत की जनता को पूरी तरह अलग-थलग करने और राष्ट्रीय निर्माण की प्रक्रिया को अस्थिर करने जैसा होगा.

'धर्म न देखते हुए, आतंकवादी को सज़ा हो'

भ्रष्टाचार पर बोलते हुए आडवाणी ने कहा, "हम भष्टाचार होते नहीं देख सकते, जैसा कि हमने संसद में हाल में देखा था. ये स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बुरा कांड है."

जब उनसे मालेगाँव पर सवाल पूछा गया तो उनका कहना था, "मैंने एक महीने तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. हाल में मैंने कहा था कि हिंदू आतंकवाद या मुस्लिम आतंकवाद की संज्ञा ग़लत है...यदि कोई आतंकवादी है तो वह चाहे किसी भी धर्म का हो, उसे सज़ा होनी चाहिए."

उनसे ये सवाल किया गया कि जिस तरह मालेगाँव के बारे में उनकी जिज्ञासा शांत करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उनसे मुलाकात की है उसी तरह जामिया नगर मुठभेड़ के बारे में भी लोगों की जिज्ञासा शांत नहीं की जानी चाहिए? लेकिन आडवाणी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

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