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गुरुवार, 20 नवंबर, 2008 को 14:29 GMT तक के समाचार
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महज़ दो वोट और सौ फ़ीसदी मतदान

मतदान करती एक महिला (फ़ाइल फ़ोटो)
छत्तीसगढ़ के सेराडांड गाँव में दो मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र बनाया गया था
ज़रा सोचिए, क्या किसी मतदान केंद्र पर केवल दो लोग मतदान करें और उसे सौ फ़ीसदी मतदान कहा जा सकता है?

पर छत्तीसगढ़ में गुरुवार को विधानसभा के लिए हुए दूसरे चरण के मतदान में कोरिया ज़िले के एक मतदान केंद्र पर कुछ ऐसा ही हुआ.

असल में घने जंगलों के बीच बसे एक नक्सल प्रभावित गाँव में केवल एक दंपत्ति के लिए ही एक मतदान केंद्र बनाया गया था.

और इस दंपत्ति ने जैसे ही मतदान किया, इस केंद्र पर सौ फीसदी मतदान का लक्ष्य पूरा हो गया. हुआ न, दो वोट और सौ फ़ीसदी मतदान.

पहली बार मतदान

कोरिया ज़िले के भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र का सेराडांड एक ऐसा गाँव है, जहाँ केवल एक ही परिवार निवास करता है. जंगली इलाक़े में ही खेती-बाड़ी करके वह अपना जीवन यापन करता है.

एक छोटी-सी झोपड़ी में रहने वाले 50 साल के देवराज, उनकी पत्नी फूलमती और 12 साल के बेटे के अलावा इस जंगली इलाक़े में कोई और नहीं रहता है.

आज तक इस इलाक़े में कोई अधिकारी भी कभी नहीं पहुँचा है. इससे इस आदिवासी दंपत्ति को कभी भी किसी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिला.

इस बार जब विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की बारी आई तो पता चला कि इस आदिवासी दंपत्ति ने अपने गाँव से मतदान केंद्र कई किलोमीटर दूर होने के कारण कभी मतदान ही नहीं किया. इसके बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर ख़ासतौर पर इस दंपत्ति के घर के पास मतदान केंद्र बनाया गया.

 इस गाँव में पहले कुछ और लोग भी रहते थे लेकिन इसके बाद वे दूसरे गाँवों में चले गए. लेकिन हमें जब देवराज और फूलमती का पता चला तो हमने ख़ासतौर पर उनके गाँव में मतदान केंद्र बनाया
कमलप्रीत सिंह, ज़िला कलेक्टर

बुधवार की शाम पीठासीन अधिकारी श्याम किशोर गुप्त समेत छह सदस्यों वाला मतदान दल इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ कई किलोमीटर पैदल जंगली रास्तों से होते हुए इस गांव में पहुँचा.

देवराज-फूलमती की झोपड़ी से कुछ ही दूरी पर मतदान केंद्र बनाया गया.

गुरुवार सुबह-सुबह ही देवराज और फूलमती ने ईवीएम का बटन दबाकर अपने जीवन में पहली बार मतदान किया.

ज़िले के कलेक्टर कमलप्रीत सिंह कहते हैं, "इस गाँव में पहले कुछ और लोग भी रहते थे लेकिन इसके बाद वे दूसरे गाँवों में चले गए. लेकिन हमें जब देवराज और फूलमती का पता चला तो हमने ख़ासतौर पर उनके गाँव में मतदान केंद्र बनाया."

इसी विधानसभा क्षेत्र के कांटो नामक एक गाँव में भी एक परिवार के नौ सदस्यों के लिए एक मतदान केंद्र बनाया गया था.

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