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रविवार, 16 नवंबर, 2008 को 06:30 GMT तक के समाचार
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आरएसएस की उड़ीसा सरकार को चेतावनी
लक्ष्मणानंद सरस्वती (फ़ाइल फ़ोटो)
लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद उड़ीसा के कई ज़िलों में हिंसा भड़क उठी थी
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में हुई हिंसा के संबंध में संघ परिवार ने राज्य सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है.

संघ परिवार की ओर से घोषणा की गई है कि अगर 15 दिसंबर तक स्वामी लक्ष्मणानंद के हत्यारों को गिरफ़्तार नहीं किया गया तो वे 25 दिसंबर को फिर से उड़ीसा बंद का आह्वान करेंगे.

विहिप नेता की हत्या के बाद बनाई गई लक्ष्मणानंद सरस्वती श्रद्धांजलि समिति के प्रमुख रत्नाकर चैनी ने पत्रकारों से कहा,'' हम उड़ीसा सरकार को एक महीने का वक़्त दे रहे हैं. अगर स्वामी जी के हत्यारों को 15 दिसंबर तक गिरफ़्तार नहीं किया गया तो 25 दिसंबर को संपूर्ण उड़ीसा में बंद रखा जाएगा.”

ग़ौरतलब है कि विहिप नेता लक्ष्मानंद सरस्वती की हत्या के बाद पूरा ज़िला सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया था.

रत्नाकर ने ये वक्तव्य उड़ीसा में देश भर से आए भगवा कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित की गई रैली के बाद पत्रकारों का दिया.

समिति ने उन 600 आदिवासियों को भी छोड़ने का माँग की है जिन्हें दंगा फैलाने और घरों में आग लगाने जैसे आरोपो में पकड़ा गया है.

समिति ने माँग की है कि जिस तरह एक आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के शक में गिरफ़्तार दो ईसाइयों को पुलिस ने छोड़ दिया है इसी तरह इन आदिवासियों को भी छोड़ा जाना चाहिए.

विहिप के राज्य सचिव गौरी प्रसाद रथ का कहना था, “निर्दोष आदिवासियों को छोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि पुलिस के पास भी उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है.”

पुलिस ने कहा था कि उसने दो ईसाई व्यक्तियों को इस बिना पर छोड़ा था क्योंकि आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या में उनके ख़िलाफ़ ज़्यादा सबूत नहीं मिले थे.

चैनी ने स्वामी लक्ष्मणानंद को ‘भारतरत्न’ दिए जाने का माँग करते हुए कहा, "जब एक मिशनरी महिला को कोलकाता में लोगों की सेवा करने के लिए भारतरत्न दिया जा सकता है तो फिर स्वामी जी के मामले में भी ऐसा मापदंड क्यों नहीं अपनाया जाता है."

रैली में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा और उन पर अल्पसंख्यकों को ख़ुश करने का इल्ज़ाम भी लगाया और कहा कि वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के 'एजेंट' की तरह काम कर रहे हैं.

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