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मुआवज़ा नहीं दे सकते: उड़ीसा सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कटक के आर्कबिशप की मांग पर कंधमाल ज़िले में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त चर्च के पुनर्निर्माण के लिए वह राज्य की धर्मनिरपेक्ष नीति के तहत धन नहीं दे सकती. ग़ौरतलब है कि आर्कबिशप ने राज्य में विभिन्न चर्च के पुनर्निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपए की माँग की थी. उड़ीसा सरकार ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके शिष्यों की हत्या के बाद भड़की हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त किए गए स्कूलों, अस्पतालों और अनाथालयों के पुनर्निर्माण के लिए वह क़दम उठा रही है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह राहत शिविरों में रह रहे लोगों की सुरक्षा के सभी उपाय कर रही है. राज्य सरकार ने कहा कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपए मुआवज़ा दिया जा चुका है और बाकी तीन लाख रुपए का भुगतान केंद्र सरकार को करना है. 'निष्पक्ष जाँच' साथ ही उड़ीसा सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में सोमवार को दाख़िल हलफ़नामे में दंगों के दौरान नन के साथ कथित बलात्कार की सीबीआई से जांच की मांग का भी विरोध किया. सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य पुलिस की अपराध शाखा घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर रही है. ग़ौरतलब है कि विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की 23 अगस्त को हत्या के बाद कंधमाल में सांप्रदायिक हिंसा का लंबा दौर चला था. ईसाइयों के ख़िलाफ़ ख़ासी हिंसा हुई थी और गिरिजाघरों पर हमले हुए थे. एक नन के कथित बलात्कार और एक फ़ादर की बुरी तरह पिटाई के मामले भी सामने आए थे. उड़ीसा सरकार के अनुसार इस सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 35 लोग मारे गए और सैकड़ों की संख्या में लोग बेघर हुए. उड़ीसा सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं. न्यायाधीश एससी महापात्र की अध्यक्षता वाले आयोग ने इसकी जाँच शुरू कर दी है. |
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