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उड़ीसा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले के चकापाद आश्रम में रविवार को लक्ष्मणानंद सरस्वती के 16वें के अवसर पर बड़ी संख्या में साधु संत जमा हो रहे हैं. दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद ने प्रतिबंध के बावजूद लक्ष्मणानंद सरस्वती की स्मृति में राज्यव्यापी यात्रा निकालने की घोषणा की है. सुप्रीम कोर्ट में फटकार मिलने के बाद उड़ीसा की नवीन पटनायक सरकार इस यात्रा को न निकलने देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वह विश्व हिंदू परिषद को अस्थि यात्रा का आयोजन नहीं करने देगी. राज्य सरकार ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया है और कंधमाल ज़िले के संवदेनशील इलाक़ों में दिन का कर्फ़्यू लगा दिया गया है. पुलिस ज़िले में प्रवेश करनेवाले हर वाहन की तलाशी ले रही है. कड़े इंतज़ाम इसके पहले लक्ष्मणानंद सरस्वती की स्मृति में शनिवार को भुवनेश्वर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के लिए प्रशासन ने कड़े इंतज़ाम किए थे.
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में 23 अगस्त को अज्ञात लोगों ने एक आश्रम पर हमला कर दिया था. इसमें विश्व हिंदू परिषद के नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती समते पाँच लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले के बाद कंधमाल ज़िले के साथ-साथ कई ज़िलों में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें कई लोग मारे गए थे. इस हिंसा में ईसाइयों और उनके पूजा घरों को निशाना बनाया गया था. इस हिंसा की गूंज दुनिया भर में सुनाई पड़ी थी और कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धार्मिक नेता पोप ने भी इस पर चिंता ज़ाहिर की थी. |
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