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राज ठाकरे के वकील जौनपुर के | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक तरफ जहाँ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कर्ता धर्ता राज ठाकरे उत्तर भारतीयों को मुंबई से भगाना चाहते हैं वहीं उत्तर भारतीय अखिलेश चौबे इनके ख़ास लोगों में से एक है. पेशे से वकील अखिलेश चौबे सन् 1987 से राज ठाकरे के साथ हैं. अक्सर लोग अटकलें लगाते हैं कि कानून के शिकंजों से बचने के लिए राज ठाकरे अपने भाषण की भी पूरी तरह से जाँच करवाते हैं. हालांकि इन सभी बातों को बेबुनियाद बताते हुए अखिलेश कहते हैं, “राज बहुत ही समझदार और बिंदास किस्म के इंसान हैं. उन्हें खुद पता नहीं होता है कि अगले दस मिनट में वो क्या बोलने वाले हैं. इन्होंने कभी भी कोई सीमा पार नहीं की है. महाराष्ट्र सरकार ज़बरदस्ती उनके ऊपर शिकंजा कस रही है.” अखिलेश के अनुसार ऐसा नहीं है कि राज अपने आस पास होने वाली हरकतों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं, हर जिले में विधि-विधान का इनका अपना पूरा दल है जो इस पार्टी पर होने वाले हर वार से लड़ने के लिए तत्पर रहती है. वो कहते हैं, ''मनसे पार्टी बनने से पहले एक दिन राज ठाकरे किसी कार्यक्रम में जा रहे थे और उस दिन पूरे शहर में यूपी दिवस को लेकर पोस्टर्स लगे हुए थे.उसी दिन राज ने अपनी पार्टी बनाने का और मराठियों को उनका अधिकार दिलाने की ठान ली थी. उनकी यह लड़ाई यूपी बनाम मराठी नहीं है बल्कि मराठी बनाम मुंबई में हर रोज़ आने वाले नए लोगों से है.” अखिलेश कहते हैं कि राज ने सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र को विकसित करने के बारे में ही सोचा है भले ही इसके लिए कुछ कुर्बानियाँ ही क्यों न देनी पड़े. वो कहते हैं, “हर चीज़ की अपनी एक कैपेसिटी होती है जो मुंबई अब पार कर चुकी है. राज को यहाँ रहने वालों से परेशानी नहीं है बल्कि हर रोज हज़ारों की संख्या में आने वाले नए लोगों से परेशानी है. सालों से यहाँ रह रहे लोगों को तो हटा नहीं सकते हैं लेकिन आने वाले लोगों पर रोक ज़रूर लग सकती है." उत्तर प्रदेश के जौनपुर से ताल्लुक रखने वाले अखिलेश को ऐसे उत्तर भारतीयों से सख़्त नफ़रत है जो समय की नज़ाकत को न समझते हुए सिर्फ राजनीति खेलने में माहिर हैं. अखिलेश कहते हैं, “कई लोग मुझसे ये सवाल करते हैं कि मैं राज ठाकरे के साथ क्यों हूँ. मैं हर किसे से यही कहना चाहता हूँ कि पहले आप एक बार सोचें. क्या ये हम सभी के लिए ठीक नहीं है. क्या मुंबई में रहने वाले लोग, और लोगों का बोझ उठा पाएंगे?” | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई से पटना लौटे छात्रों की दास्ताँ22 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'उत्तर प्रदेश के लोगों की जागीर नहीं है महाराष्ट्र'22 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस राज ठाकरे की ज़मानत पर आज सुनवाई 21 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस राज ठाकरे को अंतरिम ज़मानत मिली22 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस मुंबई में हमलों पर प्रधानमंत्री से मुलाक़ात23 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस राज को अदालत में पेश होने से मिली छूट23 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस बिहार बंद का ख़ास असर नहीं25 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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