BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 22 अक्तूबर, 2008 को 15:37 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'उत्तर प्रदेश के लोगों की जागीर नहीं है महाराष्ट्र'
मुंबई में दंगा
महाराष्ट्र सरकार पर ढिलाई बरतने का आरोप है
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रवक्ता शिरीष पारकर ने कहा है कि मुंबई में टैक्स देने वालों को वो बाहरी व्यक्ति नहीं मानते.

तो क्या वो बाहर से आकर झोपड़पट्टी में रहने वाले ग़रीबों को बाहरी मानते हैं? प्रस्तुत हैं बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी की उनसे हुई लंबी बातचीत के कुछ हिस्सेः

आपके मुताबिक़ बाहर के लोगों की परिभाषा क्या है?

जो यहाँ आकर अवैध झोपड़पट्टी बनाते हैं, यहाँ के लोगों के रोज़गार के अवसर छीनते हैं, उन्हें बाहर का कह सकते हैं.

यानी इनमें मद्रास और बंगलौर और दूसरी जगहों के लोग भी शामिल हैं?

जो टैक्स पेयर है. जो सरकार का टैक्स भरता है, वो आउटसाइडर या बाहर से आया नहीं कहलाता. मैं उन लोगों को बाहर से आया कह रहा हूँ जो लालू-मुलायम के निकम्मे राज में अपने अपने प्रदेश छोड़कर रोज़ी-रोटी के लिए महाराष्ट्र में आ गए हैं. और यहाँ पर ख़ुशहाली से रहने की बजाए अपनी अलग राजनीतिक पहचान दिखाते हैं. अगर तीस-चालीस साल से यहाँ रहने के बावजूद जो ख़ुद को यहाँ का नहीं मानते हैं, उन्हें महाराष्ट्रीय कहना ठीक नहीं होगा.

आपने कहा जो लोग टैक्स दे सकते हैं उन्हें आप बाहर से आया नहीं मानते. यानी आप टैक्स दे सकने वाले अमीर आदमी के ख़िलाफ़ नहीं हैं बल्कि झोपड़पट्टी में रहने वाले ग़रीबों के ख़िलाफ़ हैं?

नहीं, नहीं मैं ये कह रहा हूँ कि अनधिकृत जो भी धंधे चलते हैं बाहर के लोगों के..

टैक्स तो अमीर आदमी देता है, ग़रीब नहीं देता.

राज ठाकरे
उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ राज ठाकरे का अभियान जारी है

ग़रीब आदमी भी टैक्स भरता है. जो लोग अपने आप को महाराष्ट्र का नहीं मानते, उनको हम लोग आउट करने की बात कहते हैं.

ये तो आपने परिभाषा बदल दी. थोड़ी देर पहले आपने कहा जो टैक्स देने वाला है उसे बाहर का नहीं मान सकते. अब आप कह रहे हैं जो ख़ुद को महाराष्ट्र का नहीं मानता वो बाहर वाला है.

इट इज़ इम्प्लाइड. ये निहितार्थ है.

तो उनको बाहर निकालने की आपकी नीति है या ये सिर्फ़ एक राजनीतिक क़दम है?

मेरे मुँह से मत निकलवाइए कि मैं बाहर निकालने की बात कह रहा हूँ. मैं ये कह रहा हूं कि अगर हमारी सत्ता आती है तो राज साहब यहाँ क़ानूनी तरीक़े से जो भी होगा उसे प्राथमिकता में रखेंगे.

जब तक सत्ता नहीं आती तब तक क्या उन पर हमले जारी रहेंगे?

हमले कौन कर रहा है? एमएनए के दस हज़ार कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लेने के बाद आम आदमी भड़का हुआ है. लालू और मुलायम और उत्तर प्रदेश के लोगों की जागीर थोड़े ही है महाराष्ट्र. बीबीसी के लोग दक्षिण भारत में ऐसे सवाल भी नहीं पूछ सकते. क्या आप करुणानिधि, जयललिता से और वाइको से इस तरह का सवाल पूछ सकते हैं?

सवाल तो हम हर राजनीतिज्ञ से करते हैं.

नहीं जी, छोड़िए. आपकी हिंदी को दक्षिण भारत के लोग कोई भाव नहीं देते.

हम लालू यादव और मुलायम सिंह यादव से भी ऐसे सवाल करते हैं. यक़ीन कीजिए.

लालू-मुलायम निकम्मे हैं. उनका बोझ महाराष्ट्र आइंदा सहन नहीं कर पाएगा.

क्या आने वाले दिनों में मुंबई में उत्तर भारतीयों पर हमले बढ़ सकते हैं?

मैं ये नहीं कह रहा हूँ. मैं ये कह रहा हूँ कि यहाँ नौकरियों में यहीं के लोगों को प्राथमिकता जी जानी चाहिए.

 लालू और मुलायम और उत्तर प्रदेश के लोगों की जागीर थोड़े ही है महाराष्ट्र. बीबीसी के लोग दक्षिण भारत में ऐसे सवाल भी नहीं पूछ सकते. क्या आप करुणानिधि, जयललिता से और वाइको से इस तरह का सवाल पूछ सकते हैं?
शिरीष पारकर

वो तो जब सत्ता आपकी आएगी. बिहार से आए परीक्षार्थियों में से एक की मृत्यु हो गई है. क्या ऐसा आगे भी हो सकता है?

पुलिस ने इसका खंडन किया है कि उस आदमी का एमएनएस के आंदोलन से कोई संबंध है. उसके परिवार के प्रति हमारी संवेदना है. आप बात का बतंगड़ बना रहे हैं.

क्या बिहार से आए परीक्षार्थियों पर हुए हमलों की आप निंदा करते हैं?

अगर सियासत के लोग, राजनीति के लोग इसे पहले भाँप लेते कि यहाँ के नौजवानों में असंतोष है तो बात यहाँ तक पहुँचती ही नहीं.

आप उन पर हुए हमलों की निंदा करते हैं या नहीं?

पहले मैं निंदा उन लोगों की करना चाहता हूँ जिन्होंने यहाँ के आदमियों को नकारा है?

उसके बाद क्या आप बिहारी छात्रों पर हमले की निंदा करते हैं?

आप क्या समझते हैं, जनतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी हिंसा का समर्थन हो सकता है?

आप करते हैं या नहीं? सवाल आपसे है.

मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि जनतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा का समर्थन हो सकता है?

मेरा सवाल आपसे है कि बिहारी छात्रों पर हुए हमलों की आप निंदा करते हैं या नहीं?

इसके लिए ज़िम्मेदार काँग्रेस और राष्ट्रवादी काँग्रेस की सरकार है.

हमलों की आप निंदा करते हैं या नहीं?

(फ़ोन काट दिया गया.)

इससे जुड़ी ख़बरें
'गिरफ़्तार करोगे, तो पछताओगे'
20 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>