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सोमवार, 22 सितंबर, 2008 को 02:53 GMT तक के समाचार
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प्रधानमंत्री की अमरीका-फ्रांस यात्रा
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश ( फ़ाइल फोटो)
प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बुश से भी मिलेंगे
अमरीकी कांग्रेस में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर जारी बहस के बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका और फ्रांस के दस दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए हैं.

अमरीकी संसद के पास इस सत्र में भारत अमरीका परमाणु समझौता लागू करने वाले 123 समझौते को मंज़ूरी देने के लिए तीन दिन हैं और व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई है कि 25 सितंबर को जॉर्ज बुश और मनमोहन सिंह की मुलाक़ात से पहले इसे मंज़ूरी मिल सकेगी.

न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को महत्वपूर्ण सफलता मिलने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली विदेश यात्रा है जिसमें वो फ़्रांस के साथ असैन्य परमाणु सहयोग पर बातचीत भी करेंगे.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी और मनमोहन सिंह के बीच 30 सितंबर को बैठक होनी है.

अपने इस दौरे में प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी हिस्सा लेंगे जहां वो दुनिया के कई अन्य नेताओं के साथ मुलाक़ातें करेंगे.

भारत में पिछले कुछ दिनों में हुए धमाकों को देखते हुए माना जा रहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और अन्य नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की मुलाक़ात के दौरान आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा होगा.

प्रधानमंत्री की इस यात्रा में उनकी मुलाक़ात पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से भी होनी है. जहां ज़रदारी ने भारत पाक द्विपक्षीय संबंधों को रचनात्मक पुनर्जीवन देने की बात कही है वहीं माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह ज़रदारी से सीमा पार आतंकवाद पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच भी मुलाक़ात होनी है जिसमें दोनों नेताओं के बीच सौहार्द्रपूर्ण बातचीत हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की बैठक में चीन के नकारात्मक रवैए से भारत अत्यंत नाराज़ था.

मनमोहन सिंह ने पिछली बार 2005 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था. इस दौरे में वो 23 सितंबर से 27 सितंबर तक न्यूयॉर्क में होंगे जिसके बाद 29 सितंबर को न्हें फ्रांस के मारशेल्स शहर में भारत- यूरोपीय संघ सम्मेलन को संबोधित करना है.

संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री सुरक्षा परिषद के विस्तार और संयुक्त राष्ट्र को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने पर ज़ोर दे सकते हैं. इसके अलावा वो आतंकवाद, परमाणु निरस्त्रीकरण, खाद्य संकट और गरीबी ख़त्म करने जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखेंगे.

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