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संदेश के ज़रिए सहायता की पहल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एसएमएस तकनीक अपनाई जा रही है. बिहार सरकार सूचना तकनीक की इस विधा से एक ऐसा अभियान शुरू करने जा रही है जिसके तहत मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली एक निजी कंपनी के देश भर के दो करोड़ उपभोक्ता बाढ़ पीड़ितों की आर्थिक मदद कर सकेंगे. मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनी अपने सभी दो करोड़ उपभोक्ताओं को एसएमएस कर बाढ़ पीड़ितों की आर्थिक सहायता का अनुरोध करेगी. मोबाइल उपभोक्ताओं को एसएमएस के जवाब में सिर्फ इतना लिखना होगा कि उनके प्रीपेड अथवा पोस्टपेड अकाउंट से राज्य सरकार के बाढ़ राहत कोष में कितनी राशि जमा कर दी जाए. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी इस आइडिया के इतने क़ायल हुए कि उन्होंने इस एसएमएस अभियान को जल्द से जल्द लागू करने का फैसला कर लिया. दरअसल, आईआईटी बांगलौर के कुछ छात्रों ने उन्हें सुझाया कि राज्य सरकार चाहे तो मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनी एयरटेल इस अभियान को चलाने को तैयार है. सहयोग कोसी नदी में आई बाढ़ से तीस लाख से भी अधिक लोग प्रभावित हैं. मोबाइल फोन कंपनी भारती एयरटेल के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल इस एसएमएस अभियान को संचालित करने के लिए तैयार हैं. मोदी कहते हैं, "हमें मित्तल के इस सहयोग पर खुशी है". मोदी को एयरटेल के अधिकारियों ने इस अभियान में भरपूर मदद करने का आश्वासन दिया है. भारती एयरटेल से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी महेश कुमार कहते हैं, "भारत में एयरटेल के सबसे ज्यादा उपभोक्ता बिहार में ही हैं और हमें उम्मीद है कि इस अभियान में न सिर्फ़ बिहार बल्कि पूरे देश से काफी संख्या में लोग आर्थिक सहायता करने के लिए आगे आएँगे". सुशील मोदी कहते हैं, "हमें भरोसा है कि दो करोड़ मोबाइल उपभोक्ता अगर औसतन दस रुपए भी सहयोग करें तो हम बीस करोड़ रुपए जमा करने में सफल हो जाएँगे और अगर कुछ उपभोकता इससे बड़ी राशि देना चाहें तो इससे भी बड़ी रक़म जमा हो सकती है." पटना के छात्र राकेश कुमार कहते हैं, "एसएमएस के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करना हम जैसे बेरोज़गारों के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि हम पाँच-दस रुपए जैसी छोटी राशि से भी सहयोग कर सकते हैं और इसके लिए हमें किसी तरह की भागदौड़ या काग़ज़ी कार्रवाई करने की भी जरूरत नहीं है". वहीं दीपक कुमार कहते हैं, "एसएमएस से सहायता करने का आइडिया इसलिए भी निराला है क्योंकि नाममात्र ख़र्च से दान दाताओं के समूह तक आसानी से पहुँचा जा सकता है और बिना किसी परेशानी के बहुत बड़ी राशि इकट्ठी की जा सकती है". | इससे जुड़ी ख़बरें बिहार में राहत को लेकर राजनीति 03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस राहत वितरण में समन्वय का अभाव05 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस राहत सामग्री ने ही मारा..05 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस बाढ़ की आपाधापी में बाल तस्करी07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस पानी घटने के साथ महामारी की आशंका07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस बाढ़ पीड़ितों का दर्द भी अलग-अलग..07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस तटबंध टूटने की न्यायिक जाँच के आदेश10 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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