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दुर्गापुर एक्सप्रेस-वे पर फंसे हज़ारों ट्रक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टाटा की महत्वाकांक्षी कार परियोजना की तृणमूल कांग्रेस की ओर से की गई नाकेबंदी से हज़ारों ट्रक और अन्य वाहन पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर एक्सप्रेस-वे पर फंसे हुए हैं. दुर्गापुर एक्सप्रेस-वे पर लगे जाम का असर अब ग्रैंड ट्रंक रोड पर भी देखा जा रहा है. इस राजमार्ग पर भी हज़ारों ट्रक और अन्य वाहन फंसे हुए हैं. विपक्ष की नाकेबंदी से दुर्गापुर एक्सप्रेस-वे बंद हो गया है. यह राजमार्ग पश्चिम बंगाल को दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य जगहों से जोड़ता है. जाम से परेशान पश्चिम बंगाल के इन दो प्रमुख राजमार्गों के जाम होने जाने से राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो गई है. इससे लोगों को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ रही है. गुरुवार को यह नाकेबंदी अपने पाँचवे दिन में प्रवेश कर गई. इस बीच तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने गुरुवार को पूरे राज्य में शाम चार से पाँच के बीच एक घंटे के सड़क जाम की अपील की है. पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि नाकेंबेदी शांतिपूर्ण है. इससे सिंगूर स्थित टाटा की कार फैक्ट्री का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है. उधर, कलकत्ता गुड्स ट्रांसपोर्ट एशोसिएशन (सीजीटीए) का कहना है कि नाकेबंदी से उन्हें बहुत अधिक नुक़सान हो रहा है. सीजीटीए के पदाधिकारी राजा रॉय ने कहा, 'हम सिंगूर में धरना देंगे क्योंकि हम इस घाटे को सहन नहीं कर सकते हैं.' मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने विपक्ष की यह माँग ख़ारिज कर दी है कि टाटा की कार परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई चार सौ एकड़ ज़मीन वापस की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजन अब पूरा होने के क़रीब है और अगर यह पूरी हो गई तो यह अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को पश्चिम बंगाल आने के लिए प्रेरित करेगी. उन्होंने कहा, "अगर चार सौ एकड़ ज़मीन वापस कर दी गई तो इससे पूरी परियोजना प्रभावित होगी. इससे टाटा समूह राज्य छोड़कर जा सकता है, जैसा कि उसने चेतावनी भी दी है. ये पश्चिम बंगाल के लिए एक त्रासदी होगी." मुख्यमंत्री का कहना था," मैंने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को बातचीत का न्यौता भेजा है. वह यहाँ खुले दिमाग से आएँ. हमारे पास इस मामले के समाधान के कुछ विकल्प हैं. हम इस मामले का समाधान कर सकते हैं जो कि राज्य के हित में होगा." समाधान के विकल्प ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के इस अपील को ख़ारिज करते हुए कहा कि पहले उन किसानों की चार सौ एक ज़मीन वापस की जाए, जो ज़मीन नहीं देना चाहते हैं. उसके बाद ही कोई बातचीत होगी. तृणमूल के नेतृत्व वाले विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार ने टाटा की कार फैक्ट्री के लिए उपजाऊ ज़मीन जबरन अधिग्रहीत की है. टाटा की कार फैक्ट्री के लिए ली गई क़रीब एक हज़ार एकड़ ज़मीन में से छह सौ एकड़ ज़मीन के मालिकों ने ज़मीन का मुआवज़ा स्वीकार कर लिया है, जबकि चार सौ एकड़ जमीन के मालिकों ने मुआवज़ा स्वीकार नहीं किया है. टाटा समूह इस ज़मीन पर अपनी महत्वाकांक्षी कार ‘नैनो’ की फैक्ट्री लगाना चाहता है. यह दुनिया की सबसे सस्ती कार होगी. भारतीय रुपये में इसकी क़ीमत करीब एक लाख होगी. राज्य सरकार इस समस्या के समाधान के लिए तीन विकल्पों पर काम कर रही है. इसके तहत जीन किसानों की ज़मीन ली गई है उन्हें मुआवज़ा बढ़ाकर दिया जाए, उन्हें सिंगूर के ही आसपास ज़मीन के बदले ज़मीन दी जाए या उन्हें ज़मीन के बदले पेंशन दी जाए. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमारे पास कई समाधान है, देखते हैं कि विपक्ष किसे स्वीकार करता है.' |
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